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July 7, 2022

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सरकारी तेल कंपनियों के आगे नहीं टिक पा रही रिलायंस बीपी: सरकार को लिखी चिट्ठी प्रति लीटर ₹24 का हो रहा है नुकसान

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव के चलते भारत में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी तेल कंपनी रिलायंस बीपी के पांव उखाड़ने वाले हैं। कंपनी ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है कि वह सरकारी तेल कंपनियों के आगे नहीं टिक पा रही है और उसे प्रतिमा लगभग 700 करोड रुपए का घाटा लग रहा है।

रिलायंस ने बताया है कि सरकारी कंपनियों द्वारा तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी न करने से उसे 700 करोड़ का भारी नुकसान झेलना पड़ा है। 16 मार्च, 2022 तक उद्योग को पेट्रोल की लागत से कम मूल्य पर बिक्री से 13.08 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। अब यह घाटा और भी बढ़ गया है। 

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के अनुरूप दाम नहीं बढ़ाए हैं। इससे फरवरी, 2022 से ईंधन का खुदरा कारोबार करने वाली कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा है। 16 मार्च, 2022 तक उद्योग को पेट्रोल की लागत से कम मूल्य पर बिक्री से 13.08 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। वहीं डीजल पर यह नुकसान 24.09 रुपये प्रति लीटर था। एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि मंत्रालय जल्द आरबीएमएल के पत्र का जवाब देगा। हालांकि, सूत्र ने यह नहीं बताया कि मंत्रालय का जवाब क्या होगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी के संयुक्त उद्यम-RBML ने सरकार से कहा है कि भारत में निजी क्षेत्र के लिए पेट्रोल डीजल का रिटेल बिजनेस कर पाना अब  आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया है। कंपनी का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का ईंधन बाजार पर नियंत्रण है और वे पेट्रोल और डीजल का दाम लागत से नीचे ले आती हैं। इससे निजी क्षेत्र के लिए इस कारोबार में टिके रहना संभव नहीं है। 

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