
आखिर डिप्टी एक्साइज कमिश्नर बांदा हैं कहां?
करीब 3 महीने से कार्यालय से अनुपस्थित बताए जा रहे डिप्टी एक्साइज कमिश्नर बांदा एवं प्रभारी जॉइंट एक्साइज कमिश्नर आगरा संतोष तिवारी को लेकर विभागीय गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी कहां हैं और किस स्थान से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार डिप्टी एक्साइज कमिश्नर बांदा के साथ-साथ प्रभारी जॉइंट एक्साइज कमिश्नर आगरा का दायित्व भी संभाल रहे संतोष तिवारी लंबे समय से संबंधित कार्यालयों में दिखाई नहीं दिए हैं। कानपुर और कौशांबी में उनके दौरे की सूचना है। बताया जा रहा है कि आगरा में होटल बदल बदल कर विभागीय कार्रवाई में भाग ले रहे हैं। ऐसा क्यों कर रहे हैं यह रहस्य बना हुआ है। इनके सीयूजी लोकेशन से आरोप की पुष्टि हो सकती है। विभाग के महत्वपूर्ण अधिकारी के इस आचरण से विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि संबंधित अधिकारी पूर्व में कार्यालय में तैनात एक महिला कंप्यूटर ऑपरेटर से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर भी चर्चा में रहे थे। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कोई वरिष्ठ अधिकारी लंबे समय से अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं है तो इसकी जानकारी आबकारी आयुक्त कार्यालय द्वारा शासन को क्यों नहीं दी गई। क्या संबंधित अधिकारी अवकाश पर हैं, किसी विशेष दायित्व पर तैनात हैं अथवा किसी अन्य कारण से कार्यालय से दूर हैं, इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
जानकारों का कहना है कि आबकारी विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। वहीं यह भी चर्चा है कि विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर शासन की सख्त निगरानी जारी है तथा प्रमुख सचिव स्तर पर भी विभिन्न मामलों की समीक्षा की जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि प्रमुख सचिव के संज्ञान में मामला आने पर संबंधित प्रकरण की जांच कराई जा सकती है। विभागीय हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर डिप्टी एक्साइज कमिश्नर संतोष तिवारी को किसका संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उनकी कथित अनुपस्थिति पर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
अब निगाहें शासन पर टिकी हैं क्योंकि आबकारी आयुक्त कार्यालय स्तर पर इसका कोई भी संज्ञान नहीं लिया गया है।




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