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रालोद कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल हो सकती है बसपा: गठबंधन की आहट से सपा और भाजपा खेमे में हलचल

लखनऊ। लखनऊ एयरपोर्ट पर प्रियंका और जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति करवट लेती दिखाई दे रही है। लगभग 45 मिनट की इस मुलाकात के बाद जयंत चौधरी गदगद बाहर निकले हालांकि उन्होंने पत्रकारों को बातचीत का कोई विवरण नहीं दिया लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने उन्हें बड़ा ऑफर दिया है।

रालोद को 50 सीट और राज्यसभा भेजने का ऑफर

मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी ने मजे हुए राजनीतिक की तरह प्रियंका ने ऐसा सियासी जाल फेंका जिसमें जयंत चौधरी फस गए। प्रियंका ने मुलाकात में राष्ट्रीय लोक दल को पश्चिम उत्तर प्रदेश में 50 सीट चुनाव के बाद यदि पर्याप्त सीटें नहीं मिली तो भी छत्तीसगढ़ या राजस्थान से राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव रखा प्रस्ताव इतना दमदार था कि जयंत ना नहीं कह सके। उन्होंने इस पर पार्टी में चर्चा करने की बात कही।

प्रियंका और जयंत की मुलाकात के बाद बीएसपी का कांग्रेस प्रेम जागा

सूत्रों के अनुसार जयंत चौधरी और प्रियंका गांधी की मुलाकात और राष्ट्रीय लोक दल तथा कांग्रेस के संभावित गठबंधन की खबरों के बीच बसपा ने भी संकेत दिया है कि वह इस गठबंधन में शामिल हो सकती है।

बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से बसपा भारी दबाव में:

पश्चिम उत्तर प्रदेश में बसपा के कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी के कार्यकर्ता काफी बेचैन महसूस कर रहे हैं। ग्राउंड लेवल से नेगेटिव फीडबैक मिलने के बाद अब बसपा सुप्रीमो डैमेज कंट्रोल के तहत किसी गठबंधन का हिस्सा बनना चाहती हैं। पश्चिम में भाजपा के खिलाफ काफी जन आक्रोश है इसलिए उससे गठबंधन को लेकर बसपा सुप्रीमो दुविधा में हैं जबकि समाजवादी पार्टी के साथ शत्रुता और तनाव चरम पर है। ऐसे में बसपा सुप्रीमो को राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस का गठबंधन मुफीद दिखाई दे रहा है।

क्या होगा इस गठबंधन का प्रभाव:

पश्चिम उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल कांग्रेस और बसपा का गठबंधन यदि हुआ तो यह सपा और भाजपा के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। दरअसल राष्ट्रीय लोक दल के नेतृत्व में जाट और मुस्लिम जाट मतदाता लामबंद हो सकते हैं वही बसपा का परंपरागत जाट वोट भी पार्टी से नहीं हटेगा जबकि अपर कास्ट में कॉन्ग्रेस कारगर साबित हो सकती है। यह गठबंधन लगभग 55% मतों को प्रभावित कर सकता है जोकि सपा और भाजपा दोनों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

किसान नेता सपा से गठबंधन के खिलाफ:

फीडबैक या मिल रहा है कि जाटलैंड में किसान नेता सपा के साथ किसी गठबंधन के सख्त खिलाफ हैं। पिछली बार अखिलेश सरकार के रवैया से अब तक नाराज हैं। ऐसे में बड़ी मुश्किल से जाट वोटों की एकजुटता को जयंत किसी कीमत पर खोना नहीं चाहते और किसान नेताओं की राय पर ही वह कांग्रेस के साथ गठबंधन को तैयार हुए हैं। इधर मायावती के साथ गठबंधन में भी कोई अड़चन नहीं आ रही है।

गुपचुप तरीके से आकार ले रहे नए गठबंधन पर सबकी निगाहें हैं देखना है आने वाले समय में जयंत प्रियंका और मायावती की राजनीति क्या नया गुल खिलाती है