October 3, 2022

अवधभूमि

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नजरिया: आखिर मोहन भागवत को फहराना ही पड़ा तिरंगा: आजादी के पहले से ही आर एस एस करता रहा तिरंगे से नफरत: 52 वर्ष तक संघ मुख्यालय नागपुर में नहीं फहराया गया था तिरंगा

नई दिल्ली। स्वतंत्रता के महासंग्राम में जिस तिरंगे की छत्रछाया में लाखों लोग शहीद हुए उस तिरंगे को हेय दृष्टि से देखने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आखिरकार तिरंगा स्वीकार करना पड़ा और पहली बार संघ प्रमुख ने अपनी डीपी बदलते हुए राष्ट्रध्वज को फ्रेम किया।

आजादी की लड़ाई में जब तिरंगे को राष्ट्र ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया उस समय कि हिंदू महासभा जो वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूप में सक्रिय है उसने तिरंगा को स्वीकारने से इंकार कर दिया था। वीर सावरकर ने तथा गुरु गोलवलकर ने भी तिरंगे को राष्ट्र ध्वज मानने से इनकार किया था और आजादी के बाद भी हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालयों में गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे कभी नहीं कराया गया । आजादी के 52 वर्ष बाद 2000 में पहली बार संघ मुख्यालय नागपुर में तिरंगा फहराया गया।

मोदी की राजनीति के आगे बेबस हुए मोहन भागवत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब हर घर तिरंगा अभियान शुरू किया तो इस अभियान का सबसे बड़ा दबाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर ही पड़ा। उनके सामने सबसे बड़ी चिंता थी कि राष्ट्रवाद की इस लहर में यदि उनके कार्यालय और शाखाओं में तिरंगा नहीं फहराया गया तो लोग उन्हें शक की नजर से देखेंगे और कांग्रेस का यह आरोप कि संघ के लोग स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के प्रति वफादार थे इसकी पुष्टि हो जाएगी।

संघ प्रमुख ने सभी से तिरंगा फहराने की की अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हर घर तिरंगा अभियान को गति दी है. RSS ने शनिवार को अपने कार्यालय में तिरंगा फहराने का एक वीडियो जारी किया. इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत तिरंगा फहरा रहे हैं. इसके साथ ही लिखा- ‘स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मनाएं. हर घर तिरंगा फहराएं. राष्ट्रीय स्वाभिमान जगाएं.’

देश बेचने वाले तिरंगा बेच रहे हैं – कांग्रेस

वहीं, तिरंगा अभियान को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने निशाना साधा और कहा- वो लोग जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा दिया, जिन्होंने हमारे देश को धोखा दिया, जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता संग्राम और भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया, जिन्होंने अंग्रेजों के लिए काम किया, जिन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी, आज वे हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बेच रहे हैं. तिरंगा बेचो पार्टी.