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May 22, 2022

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247 विश्वनाथगंज विधानसभा: निर्दलीय संजय पांडे के सामने अपना दल की सीट खतरे में, सपा के सौरभ सिंह भी लड़ाई में

प्रतापगढ़। समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री राजाराम पांडेय के पुत्र और पिछले 5 वर्षों से विश्वनाथ दिन विधानसभा में चुनाव की तैयारी कर रहे संजय पांडे का टिकट जब काटा था तो सपने में भी नहीं सोचा था संजय पांडे के जाने के बाद विश्वनाथगंज विधानसभा में उसे जूझना पड़ेगा।

संजय पांडे इस समय सहानुभूति की लहर पर सवार हैं। समाज के सभी वर्गों का उन्हें समर्थन हासिल हो रहा है। मुस्लिम और ब्राह्मण जहां उनके पीछे लामबंद दिखाई दे रहे हैं वही क्षत्रिय मतदाताओं में भी उन्होंने एक बड़ा हिस्सा अपने साथ जोड़ने में सफलता प्राप्त की है। @avadhbhuminews टीम ने विश्वनाथगंज विधानसभा में विभिन्न जातियों के रुझान का जो आकलन किया है वह कुछ इस तरह है

छत्रिय मतदाताओं का रुझान

विधानसभा में अधिकांश क्षत्रिय मतदाताओं का रुझान समाजवादी पार्टी प्रत्याशी की ओर है उसके बाद निर्दल प्रत्याशी के साथ भी बड़ी संख्या में क्षत्रिय मतदाता दिखाई दे रहे हैं। कुछ मतदाता योगी और मोदी के नाम पर अपना दल प्रत्याशी के साथ भी नजर आ रहे हैं।

ठाकुर मतदाताओं में अनिल राजा को भारतीय जनता पार्टी द्वारा टिकट न देने का मुद्दा भी हावी है। कई लोगों ने इस बात के लिए नाराजगी जाहिर की कि आखिर 5 वर्ष से अनिल राजा भारतीय जनता पार्टी के आश्वासन पर गांव-गांव घूम रहे थे । पार्टी का कार्यकर्ता बनकर काम कर रहे थे । इतना ही नहीं उन्होंने अपनी झूसी और प्रतापगढ़ शहर की करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन संघ को दान भी दिया। भाजपा के सभी छोटे बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया लेकिन उसके बावजूद भाजपा के प्रत्याशियों के चयन के लिए जो पैनल भेजा गया उसमें नाम ही नहीं रखा गया। नाराज अनिल राजा ने निर्दलीय नामांकन कर दिया था अपने समर्थकों की बैठक बुलाई थी जहां पर भाजपा के रवैया पर गहरी नाराजगी जाहिर की गई थी लेकिन बाद में संघ के कई बड़े नेताओं के अनुरोध पर उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। अनिल राजा भले ही मान गए लेकिन उनके बहुत से समर्थक अब भी भाजपा से नाराज बताए जा रहे हैं। भाजपा से नाराज होने के बावजूद बहुत से ठाकुर मतदाता समाजवादी पार्टी के साथ जाने से कतरा रहे हैं। अखिलेश द्वारा राजा भैया के लिए जो बेरुखी दिखाई गई थी उसके चलते यहां बहुत से छत्रिय मतदाता सपा से नाराज हैं।

जो भी छत्रिय मतदाता सपा और भाजपा से नाराज हैं वह निर्दलीय संजय पांडे के समर्थन में खुलकर आ गए हैं।

ब्राह्मणों का रुझान

विश्वनाथगंज विधानसभा में ब्राह्मण पूरी तरह निर्दलीय संजय पांडे के पक्ष में लामबंद है जिसका खामियाजा अपना दल एस के प्रत्याशी जीत लाल पटेल को भी भुगतना पड़ रहा है। पिछली बार योगी मोदी लहर में लगभग 40% ब्राह्मण मतदाता अपना दल गठबंधन के साथ चले गए थे जिसकी वजह से उस समय कांग्रेस के सिंबल पर लड़े संजय पांडे को हार का सामना करना पड़ा।

संजय पांडे के पक्ष में ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान इतना बड़ा है कि भारतीय जनता पार्टी में बूथ स्तर के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी संजय पांडे के साथ चले गए हैं। ब्राह्मणों से बात करने के बाद साफ-साफ वह कहते हैं कि इस बार हम निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं।

मुस्लिमों का रुझान

विश्वनाथगंज विधानसभा में मुसलमान मतदाताओं की संख्या क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या के बराबर है। अधिकांश मुस्लिम मतदाता संजय पांडे के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं जिसके वजह से संजय पांडे का दावा मजबूत नजर आ रहा है। इस वोट बैंक में लगभग 70% तक संजय पांडे को मतदान हो सकता है। शेष मतों में सपा का रुझान दिखाई दे रहा है।

वैश्य मतदाताओं का रुझान

पिछले चुनाव में योगी मोदी के नाम पर पूरी तरह लामबंद हुआ वैश्य समुदाय भी इस बार बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है। कई लोगों ने निर्दलीय संजय पांडे को वोट देने की बात कही तो काफी लोगों ने अब भी योगी मोदी के नाम पर अपना दल गठबंधन प्रत्याशी को वोट देने का इरादा जताया।

दलित मतदाताओं में भी बिखराव

बहुजन समाज पार्टी की स्थिति काफी कमजोर होती जा रही है। हमेशा मायावती के साथ लामबंद होने वाला यह वोट बैंक इस बार काफी बिखरा हुआ नजर आ रहा है। पासी समाज में जहां इंद्रजीत सरोज की वजह से समाजवादी पार्टी का रुझान देखा गया वहीं निर्दलीय संजय पांडे के साथ भी पासी समाज के लोग नजर आए। चमार वोट बैंक जरूर बहुजन समाज पार्टी के साथ अब भी जुड़ा हुआ है।

कुर्मी मतदाताओं का रुझान

विधानसभा में कुर्मी पटेल समाज भी एक बड़ा वोट बैंक है इस वोट बैंक में अधिकांश अपना दल प्रत्याशी के साथ लामबंद दिखाई दिए लेकिन लगभग 20% वोट इसमें भी बिखराव की दशा में है जिसका कुछ हिस्सा निर्दलीय संजय पांडे को तो कुछ हिस्सा सपा को जाता हुआ दिख रहा है।

अगर जातियों का रुझान देखें और उनका विश्लेषण करें तो इस समय निर्दलीय संजय पांडे सबसे आगे हैं जबकि अपना दल के जीत लाल पटेल और सौरभ सिंह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बचे हुए समय में लोगों के रुझान में क्या परिवर्तन होता है चुनाव परिणाम उसी पर निर्भर करता है।

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