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June 27, 2022

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कोरोना की दूसरी लहर में बांग्लादेश बना एशिया की आर्थिक महाशक्ति जबकि ध्वस्त हो गई भारत की अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जहां भारत में लाखों लोग मारे गए। अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। गरीबी और महंगाई चरम पर पहुंच गई। करोड़ों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। वही महज कुछ साल पहले दुनिया का सबसे गरीब देशों में शामिल बांग्लादेश भारत को पछाड़कर एशिया की दूसरी महाशक्ति बन गया।

भारत की नोटबंदी और जीएसटी बांग्लादेश के लिए साबित हुआ वरदान

मोदी सरकार आने के बाद दो बड़े फैसले लिए गए जिसमें नोटबंदी और जीएसटी का नाम सबसे ऊपर है। भारत में नोटबंदी और जीएसटी लागू होते ही टेक्सटाइल इंडस्ट्री पूरी तरह तबाह हो गई। भारत के धागे का सबसे बड़ा आयातक देश चीन ने जीएसटी लगने के बाद भारत के धागे खरीदने के बजाय बांग्लादेश को महत्त्व दिया। बांग्लादेश ने इस अवसर का लाभ उठाया उसने भारत के मुकाबले रियायती दर में चीन कोरिया जापान वियतनाम और मलेशिया इंडोनेशिया जैसे विकसित बाजारों पर अपनी बादशाहत कायम कर ली। बांग्लादेश को प्रचुर मात्रा में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति हुई जिससे उसकी अर्थव्यवस्था का आकार 30% तक बढ़ गया।

भारत में गरीबी 44% बढ़ गई जबकि बांग्लादेश में गरीबी 49% कम हो गई

अगर पिछले एक दशक की बात करें जिसमें 7 वर्ष मोदी सरकार के भी हैं तो भारत में करोड़ों लोगों की नौकरी गई। देश की 70 फ़ीसदी आबादी सरकारी राशन पर गुजारा कर रही है। 60 फ़ीसदी आबादी की प्रति व्यक्ति आय ₹32000 से कम है वही तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो बांग्लादेश की 90% आबादी की प्रति व्यक्ति आय ₹ 130000 से अधिक है।

बांग्लादेश में मात्र 14% लोग गरीबी रेखा के नीचे

शेख हसीना सरकार के शानदार कामकाज का नतीजा है कि आज बांग्लादेश रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री का किंग बन गया है। लाखों की संख्या में छोटे बड़े कारखाने छोटे-छोटे कस्बों में भी खुले हुए हैं जिसमें 90 फ़ीसदी से अधिक आबादी को रोजगार मिला हुआ है। बांग्लादेश के धागे और रेडीमेड गारमेंट्स की मांग पूरी दुनिया में है क्योंकि यह सस्ते और गुणवत्तापूर्ण होते हैं।

न्यूनतम विकसित देशों की कतार से निकलकर विकासशील देशों में शामिल

बांग्लादेश जहां अपने कर्ज को तेजी से घटा रहा है और निवेशक देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले 10 सालों में बांग्लादेश ने बहुत ही कम विदेशी कर्ज लिया है जब किस समय से पहले ही बहुत से कर्ज चुका रहा है वहीं भारत ने अपने कुल विदेशी कर्ज का 46% केवल 7 सालों में ही लिया है और कर्ज भी समय से नहीं चुका पा रहा है।