October 3, 2022

अवधभूमि

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लोक निर्माण विभाग में महा घोटाला: जतिन प्रसाद की जा सकती है कुर्सी: विशेष सचिव प्रभुनाथ के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश

लखनऊ। लोक निर्माण विभाग में बड़े पैमाने पर हुए ट्रांसफर घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी गंभीर हो गए हैं। विभाग में ट्रांसफर घोटाले की वजह से सरकार की छवि पर असर पड़ा था लेकिन भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पर अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी शिकायतों की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। विशेष सचिव प्रभुनाथ को घोटालों का मास्टरमाइंड मांगते हुए योगी सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है।

मंत्री जतिन प्रसाद तक आ सकती है घोटालों की जांच

कहा जा रहा है कि कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद के निजी सचिव अनिल पांडे और विशेष सचिव प्रभुनाथ की मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया गया था। ऐसे में मंत्री पर सीधी कार्रवाई करने के बजाए पीडब्ल्यूडी ट्रांसफर घोटाले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद को मुश्किलों में फंसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीब माने जाने वाले जितिन प्रसाद पर इसे एक हमले के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की है ऐसे में इस सिफारिश को इनकार करना केंद्र सरकार के लिए खासा मुश्किल होगा। सूत्रों ने दावा किया है कि अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह संजय भूसरेड्डी और मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की कमेटी की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को दे दी गई है और इसमें मंत्री और उनके करीबी फंसते नजर आ रहे हैं ऐसे में कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद पर सीधी कार्रवाई करने के बजाए मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर कूटनीतिक दांव चल दिया है। दरअसल योगी चाहते हैं कि सीबीआई जांच करें और कैबिनेट मंत्री तथा उनके सहयोगियों की घोटालों में मिलीभगत उजागर करें इससे जहां योगी की इमानदारी जनमानस में एक बार फिर चर्चा में आएगी वही दिल्ली दरबार जिसके जितिन प्रसाद करीबी माने जाते हैं और जिन की कृपा से प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने हैं उनकी छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

ठोस सबूत मिलने के बाद की गई सिफारिश

सूत्रों का कहना है कि विशेष सचिव प्रभुनाथ एक बहाना है जबकि जितिन प्रसाद फिलहाल खास निशाना है। ट्रांसफर घोटाले में एस्से अकाट्य सबूत मिले हैं जो मंत्री जितिन प्रसाद तक पहुंचते हैं। सीबीआई जांच में यदि प्रभुनाथ दोषी पाए जाते हैं तो कैबिनेट मंत्री होने के नाते जितिन प्रसाद पर भी दबाव बढ़ेगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।