September 30, 2022

अवधभूमि

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आबकारी विभाग में महा घोटाला: फर्जी क्यूआर कोड और ओवर रेटिंग से सरकार को प्रतिदिन 100 करोड़ का चूना लगा रहे शराब माफिया: संजय भूसरेड्डी के कैंप कार्यालय में सक्रिय है चेन्नई गैंग

पोंटी चड्ढा के वफादार अमित अग्रवाल को दी गई है शीरा आवंटन की जिम्मेदारी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आबकारी विभाग में पोंटी चड्ढा की वेब कंपनी का वर्चस्व और एकाधिकार तोड़ने के लिए नई आबकारी नीति बनाने के निर्देश दिए थे जिसके बाद पोंटी चड्ढा की वेब कंपनी बैकफुट पर आ गई थी। सब कुछ ठीक चल रहा था इसी बीच मुख्यालय में तैनात कंप्यूटर लिपिक अमित अग्रवाल को पोंटी चड्ढा की शराब कंपनी साध लिया। अमित अग्रवाल देव कंपनी के कई डिस्टलरी में डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत हैं। अमित अग्रवाल जो कि संजय भूसरेड्डी की नाक का बाल है उसने वेब कंपनी और संजय भूसरेड्डी की दोस्ती करा दी। एक समझौता किया गया जिसमें यह तय हुआ कि शीरा आवंटन का पटल सिर्फ और सिर्फ अमित अग्रवाल ही देखेंगे। इसके लिए वेब कंपनी मुंह मांगी कीमत देने को तैयार हो गई। बताने की जरूरत नहीं कि संजय भूसरेड्डी वेब कंपनी के प्रस्ताव को ठुकरा नहीं पाए और अमित अग्रवाल वेब कंपनी के एजेंट के रूप में आबकारी मुख्यालय में लगभग 2 दशको से आबकारी मुख्यालय में ही तैनात हैं और बेब कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचा रहा है।

अमित अग्रवाल किस तरह से वेब कंपनी को पहुंचाता है फायदा

अमित अग्रवाल का सबसे बड़ा काम यही है कि वह बेब कंपनी की प्रतिस्पर्धी कंपनियों के काम में गंभीर आपत्तियां लगा देता है जिससे वेब कंपनी का काम आसान हो जाता है। सीधा आवंटन में भी वही होता है जो वेब कंपनी चाहती है। इसके बदले अमित अग्रवाल को करोड़ों रुपए मिलते हैं।

क्यूआर कोड में फर्जीवाड़ा 100 करोड़ रुपए प्रतिदिन का लग रहा है चूना

जानकार सूत्रों का कहना है कि आबकारी मुख्यालय के क्यू आर कोड की कॉपी करके डिस्टलरी द्वारा प्रतिदिन 100 करोड़ से अधिक का राजस्व क्षति पहुंचाया जा रहा है।

कैसे होता है फर्जीवाड़ा

सरकार ने नकली शराब और अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए सभी डिस्टलरी को क्यूआर कोड जारी किए और यह अनिवार्य किया कि बिना क्यूआर कोड के कोई भी शराब नहीं बिकेगी। लेकिन शराब कंपनी बेब के एजेंट अमित अग्रवाल ने इस मामले में अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी और आबकारी मुख्यालय में तैनात ज्वाइंट कमिश्नर लाइसेंस हरीश चंद्र श्रीवास्तव को विश्वास में लेकर फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। डिस्टलरी से पहली बार निकलने वाली शराब की बोतलों का क्यूआर कोड स्कैन होने के बाद उसी क्यूआर कोड की कॉपी बनाकर दूसरी बार तीसरी बार चौथी बार पांचवी बार और कई बार शराब की बोतलें डिस्टलरी से बाहर निकली और देसी विदेशी मदिरा की दुकानों पर पहुंच गई। सरकार को जो भी राजस्व मिला वह पहली बार डिस्टलरी से क्यूआर कोड के स्कैन से ही प्राप्त हुआ लेकिन उसके बाद जो भी बोतल डिस्टलरी से गई उससे सरकार को जहां जीएसटी के रूप में भारी राजस्व का घाटा हुआ वही शराब माफियाओं को प्रतिदिन 100 करोड़ रुपए का फायदा मिला। यह खेल अब भी जारी है।

यद्यपि डिस्टलरी में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं फिर भी कभी इनकी जांच नहीं होती क्योंकि इनकी जांच की जिम्मेदारी ज्वाइंट कमिश्नर हरीश चंद्र श्रीवास्तव की है जो कि शराब कंपनियों के हाथों बिके हुए हैं।

नकली शराब से मौत की जांच ठंडे बस्ते में

पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब पीने से 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी यह मौत उन्नाव कानपुर मेरठ फतेहपुर मिर्जापुर बुलंदशहर जैसे कई जिलों में हुई थी। यह तथ्य प्रकाश में आया था कि मृतकों ने सरकारी ठेके से ही शराब खरीदी थी। लाइसेंसी दुकानों पर शराब डिस्टलरी से ही आते हैं ऐसे में सवाल उठता है कि डिस्टलरी की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई। इसका जवाब यही है कि इस खेल में भी अमित अग्रवाल और संजय भूसरेड्डी शामिल है। मामले को रफा-दफा करने के लिए इन्हें संतुष्ट किया गया है। जहरीली शराब से मौतों के बाद सरकार की काफी फजीहत हुई थी जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रैकिंग सिस्टम और पीओएस मशीन को तुरंत लागू करने का आदेश दिया था उनका यह आदेश 4 सालों तक धूल फांकता रहा बताने की जरूरत नहीं कि संजय भूसरेड्डी के स्तर से ही यह जांच अंजाम तक नहीं पहुंच पाई

पीओएस मशीन का वर्क आर्डर चेन्नई की कंपनी को ही क्यों मिला

वर्ष 2018 में टेंडर हुआ और 2022 में अब जाकर पीओएस मशीन का डेमोंसट्रेशन हो रहा है जाहिर सी बात है कि 4 वर्षों तक अनुज्ञा पी लाइसेंसी को पीओएस मशीन से जानबूझकर दूर रखा गया ताकि शराब की ओवर रेटिंग कराई जा सके और इस अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा विभाग के आला हाकिम को मिल सके।

एक अनुमान के मुताबिक शराब की प्रत्येक बोतल पर 15 से लेकर डेढ़ सौ रुपए तक ओवर रेटिंग होती है और इस ओवर रेटिंग का बड़ा हिस्सा शराब कंपनी और विभाग के आला अधिकारी के बीच बंदरबांट किया जाता है।

मुख्यमंत्री के आदेश को नहीं मान रहे संजय भूसरेड्डी

शराब की तस्करी नकली शराब की बिक्री और अवैध शराब की वजह से सरकार को प्रतिमाह 3 से 5000 करोड़ रुपए का चूना लग रहा था जिसको देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल क्यूआर कोड और पीओएस मशीन लगाने का निर्देश दिया था लेकिन विभाग के आला अधिकारी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिए सोचने वाली बात है कि वर्ष 2018 में टेंडर होने के बाद पीओएस मशीन 4 सालों के बाद भी अनुज्ञापी लाइसेंसी दुकानों तक नहीं पहुंच पाई। पीओएस मशीन लगने से शराब की बिक्री का सही सही आंकड़ा सरकार के पास बहुत सकता था और यह भी पता लग सकता था की बिक्री के सापेक्ष सरकार को राजस्व मिला या नहीं।

पीओएस मशीन नहीं मिली फिर भी कंपनी को करोड़ों का फायदा हुआ

संजय भूसरेड्डी की जान पहचान वाली चेन्नई की जिस कंपनी को पीओएस मशीन लगाने का काम दिया गया है उसमें भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कंपनी को आबकारी विभाग में इस तरह का काम करने का कोई अनुभव नहीं है उसे राशन की दुकानों पर लगने वाले पीओएस मशीन का काम मिला था इस कंपनी की डिवाइस की बहुत सारी शिकायतें थी यह सब जानते हुए भी इस कंपनी को 6000 डिवाइस बनाने का काम दिया गया लेकिन अब सामने आ रहा है कि कंपनी की डिवाइस घटिया है और सही तरीके से काम नहीं कर रही है। इस कंपनी का चयन करते हुए भी भारी अनियमितताएं बरती गई कंपनी के पास अनुभव ना होते हुए भी उसे काम दिया गया और 780 करोड रुपए का भुगतान हुआ।

पोंटी चड्ढा की शराब कंपनी का उत्तर प्रदेश में एकाधिकार बाकी शराब कंपनियां घाटे में

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस वेब कंपनी के वर्चस्व और एकाधिकार को तोड़ना चाहते थे वह पूरी तरह उत्तर प्रदेश में हावी हो गया है। 70% डिस्टलरी पर कब्जा है। 55 से अधिक जनपदों में fl2 और cl2 वेब कंपनी के हैं या फिर उनके समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इतना ही नहीं 70% से ज्यादा अनुज्ञापी लाइसेंसी वेब कंपनी की ही शराब बेचने के लिए मजबूर है । यह सब संजय भूसरेड्डी अमित अग्रवाल और ज्वाइन कमिश्नर हरीश चंद श्रीवास्तव के सिंडिकेट की बदौलत संभव हो पाया है।

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