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January 21, 2022

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69000 शिक्षक भर्ती में ठगे गए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी: 10% सवर्ण आरक्षण लागू ही नहीं हुआ

लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस भर्ती को लेकर जहां पिछड़े वर्ग के लोग आंदोलन कर रहे हैं वहीं सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी मोर्चा खोल दिया है।

सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि गरीब सवर्णों का आरक्षण इस भर्ती पर लागू ही नहीं हुआ जिसकी वजह से यह पूरी भर्ती अवैध है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि सवर्णों को कम से कम 7000 सीटें आरक्षण के तहत मिलनी थी जो इस भर्ती में मिली ही नहीं।

सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की माने तो कुल 70 हजार रिक्तियां पूरी की गई हैं जिसमें 50000 से ज्यादा लोग आरक्षित वर्ग से आ गए हैं।

सामान्य अभ्यर्थियों के साथ हुए अन्याय को लेकर इस वर्ग के अभ्यर्थियों ने अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एक लीगल टीम बनाई है जो इस अनियमितता को अदालत में चुनौती दे रही है। इस टीम के सदस्य अभिषेक तिवारी और अध्यक्ष विवेक द्विवेदी ने कहा कि सरकार सरासर अन्याय कर रही है। सामान्य वर्ग का हक मारा जा रहा है। सरकार पूरी तरह जातिगत तुष्टीकरण पर उतर आई है। अभिषेक तिवारी ने बताया कि इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई है जहां कोर्ट ने हमारी याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस भेजा है।

राज्य सरकार ने की गंभीर अनियमितताएं

लीगल टीम के सदस्य अभिषेक तिवारी की माने तो पहले सरकार ने अपने विज्ञापन में कहा था की आवश्यकता अनुसार भर्तियां घटाया बढ़ाई जाएंगी। बाद में सरकार ने कोर्ट में ही हलफनामा देकर कहा कि निर्धारित पदों की विज्ञप्ति के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन संभव नहीं है।

अब सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी यही सवाल राज्य सरकार से पूछ रहे हैं कि जब निर्धारित पदों के विज्ञापन के बाद सरकार उसमें किसी प्रकार से संशोधन नहीं कर सकती तो फिर आप कैसे हो रहा है आखिर किस आधार पर राज्य सरकार 6000 ओबीसी पदों में मनमाने ढंग से बढ़ोतरी कर रही है।

बहुत से सवाल है जिसका जवाब राज्य सरकार को देना है।

शिक्षामित्रों के 137000 पदों को छीन कर की गई थी भर्ती

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार के हलफनामे के बाद शिक्षामित्रों की सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी समाप्त हो गई थी। उस समय कोर्ट ने 6 महीने के भीतर इन सभी पदों पर भर्ती का निर्देश दिया था जिसके अनुपालन में योगी सरकार 68500 और 69000 भर्तियों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया और दोनों ही भर्तियों में गंभीर अनियमितता बरती गई जिसको लेकर पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग दोनों आमने-सामने है।

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