October 3, 2022

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विदेश नीति पर सवाल: भारत सरकार की आपत्ति के बावजूद श्रीलंका ने चीन के जासूसी जहाज को अपने बंदरगाह पर जगह दी

चीन का जासूसी जहाज हंबनटोटा पर दिखा

नई दिल्ली। सरकार की विदेश नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका की मदद करने के बावजूद श्रीलंका ने भारत के लिए खतरा बने चीन के जासूसी जहाज को अपने इलाके के हंबनटोटा बंदरगाह पर पोर्ट करने की अनुमति दे दी।

श्रीलंका ने एक बार फिर भारत के बजाय चीन का समर्थन किया है. पिछले कुछ दिनों से चीन के जहाज  युआन वांग 5 को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. ये जहाज श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर खड़ा होना चाहता है. लेकिन भारत ने इसे एक जासूसी जहाज माना है और वो इसे अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानता है. श्रीलंका की सरकार को भारत द्वारा ये आपत्ति जाहिर भी कर दी गई है. लेकिन इस सब के बावजूद भी श्रीलंका ने चीन के इस जहाज को हरी झंडी दिखा दी है. अब 16 अगस्त को हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन का युआन वांग 5 खड़ा हो सकेगा. 

जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेशनल शिपिंग और एनालिटिक्स साइट ने चीन के इस जहाज को एक रिसर्च और सर्वे वाला जहाज माना है. लेकिन भारत के मुताबिक ये जहाज चीन के लिए जासूसी का काम कर सकता है. वहां मौजूद देश के सैन्य प्रतिष्ठानों पर चीन अपनी पैनी नजर रख सकता है. इसी खतरे को समझते हुए भारत ने श्रीलंका के सामने आपत्ति जताई थी. बड़े अधिकारियों से बात कर विरोध भी दर्ज करवाया गया था. लेकिन शायद उस आपत्ति का कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि श्रीलंका ने एक बार फिर जरूरी मुद्दे पर भारत के बजाय चीन का साथ दे दिया है.

बताया तो ये भी गया है कि चीनी शिप को फ्यूल भरने के लिए श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर डॉक करना है. फ्यूल लेने के बाद अगस्त-सितंबर के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में शिप से सेटेलाइट कंट्रोल और रिसर्च ट्रैकिंग करने की योजना है. लेकिन भारत को चीन की इन गतिविधियों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है. वो चीन की इन गतिविधियों को श्रीलंका में एक दखलअंदाजी के रूप में देख रहा है. वैसे श्रीलंका को भी चीन की ये दखलअंदाजी पहले भारी पड़ चुकी है. 2017 में श्रीलंका ने दक्षिणी बंदरगाह को चीन के मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स को 99 साल के लिए पट्टे पर दे दिया था  क्योंकि श्रीलंका ऋण का भुगतान करने में असमर्थ रहा.