अवधभूमि

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**🔴 डीपीसी 2025–26 में बड़ा खेल?

आबकारी विभाग में समय से पहले पदोन्नति, अधूरी ACR और संदिग्ध चयन से हड़कंप**

अवधभूमि | विशेष रिपोर्ट
प्रयागराज स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय में जारी चयन वर्ष 2025–26 की डीपीसी सूची ने पूरे विभाग में हलचल मचा दी है। अभिलेखों के अनुसार, डीपीसी 12 नवंबर 2025 को कर दी गई, जबकि इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक एसीआर/एपीएआर 2024–25 अभी पूर्ण रूप से बंद भी नहीं हुई थी।

दस्तावेज़ की भाषा और तिथियों के मेल न खाने से साफ संकेत मिलते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया जल्दबाज़ी में और नियमों को किनारे रखकर की गई।


🔶 अधूरी ACR पर आधारित डीपीसी — सबसे बड़ा सवाल

आबकारी विभाग में पदोन्नति का आधार बनने वाली एसीआर/एपीएआर 2024–25 सामान्यतः जून–जुलाई 2025 के बाद ही बंद होती है।
लेकिन डीपीसी नवंबर 2025 में करा दी गई और उसमें उसी वर्ष की एसीआर का उपयोग किया गया।

➡ कर्मचारी वर्ग इसे “स्पष्ट प्रक्रिया उल्लंघन और पूर्व-निर्धारित चयन” बता रहा है।


🟧 कौन-कौन हुए चयनित? (आदेश के अनुसार)

लिपिक संवर्ग

  • मो. शमीम (वरिष्ठता क्रम: 287)

आशुलिपिक संवर्ग

  • प्रमोद कुमार (वरिष्ठता क्रम: 29)

उप आबकारी निरीक्षक संवर्ग

  • मृत्युंजय कुमार सिंह — पूर्व में अनुरोधित के आधार पर
  • जितेंद्र सिंह — वरिष्ठता 31-12-2025 तक मान्य

ध्यान देने योग्य:
जब डीपीसी नवंबर में हुई है, तो दिसंबर 2025 की भविष्य की वरिष्ठता कैसे जोड़ दी गई?


🔴 कार्मिक शाखा पर उठे सवाल — ‘योजना बनाकर फाइलें भेजी गईं’

सूत्र बताते हैं कि फाइलों को आयोग भेजने में
सहायक आबकारी आयुक्त (कार्मिक) मुबारक अली
और
कार्मिक अनुभाग के प्रसेन राय
की भूमिका सबसे अधिक थी।

व्यापक चर्चा है कि—

  • चुनिंदा फाइलें तैयार कराई गईं
  • कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों की प्रविष्टियाँ रोकी गईं
  • और डीपीसी को नवंबर में कराकर “लाभ पहुंचाने” की तैयारी पहले से थी।

अवधभूमि को मिले इनपुट के अनुसार, इसे विभाग के भीतर “सिलेक्टेड DPC” कहा जा रहा है।


🟪 आदेश के नोट्स ने खोली सबसे बड़ी पोल

नोट-3:

नव पदोन्नत निरीक्षकों की वरिष्ठता बाद में तय की जाएगी।

➡ वरिष्ठता तय किए बिना पदोन्नति — यह स्वयं में पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है।

नोट-4:

यदि कोई रिट लंबित हो, तो आदेश उस पर निर्भर रहेगा।

➡ यानी विभाग को पहले से अंदेशा था कि चयन विवादित है।


🔶 कमिश्नर की भूमिका भी चर्चा में

आदेश पर हस्ताक्षर आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह के हैं।
कर्मचारी वर्ग पूछ रहा है कि—

  • समय से छह महीने पहले डीपीसी कराने की अनुमति किसने दी?
  • भविष्य की वरिष्ठता जोड़ने पर शीर्ष स्तर ने आपत्ति क्यों नहीं की?

विभाग के भीतर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि “बिना मौन सहमति ऐसा संभव नहीं।”


🔴 कर्मचारी संगठनों की मांग — विजिलेंस जांच आवश्यक

अवधभूमि को मिली जानकारी के अनुसार, कर्मचारी संगठनों ने मांग रखी है—

  • चयन वर्ष 2025–26 की डीपीसी की पूर्ण रिकॉर्ड समीक्षा
  • अधूरी एसीआर के उपयोग की जांच
  • कार्मिक शाखा की भूमिका पर विजिलेंस इनक्वायरी
  • चयन से संबंधित सभी दस्तावेज़ों का ऑडिट

📌 अवधभूमि का निष्कर्ष

जारी आदेश की भाषा, तिथियाँ और नोट्स, स्वयं बता रहे हैं कि—

✔ डीपीसी जल्दबाज़ी में हुई
✔ एसीआर अधूरी होने के बावजूद शामिल की गई
✔ भविष्य की वरिष्ठता जोड़कर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं
✔ कार्मिक शाखा का रोल अत्यंत संदिग्ध रहा
✔ प्रक्रिया पर विवाद की आशंका आदेश में ही दर्ज है

यह मामला अब केवल विभागीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक संस्थागत प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।


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