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July 7, 2022

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यूक्रेन युद्ध में टिक नहीं पा रहे रूस के संविदा सैनिक: यूक्रेन के नियमित सैनिकों ने उखाड़े रूसी फौज के पांव

नई दिल्ली। भारत में अग्नीपथ योजना को लेकर पूरे देश में हंगामा बरपा है। आगजनी पथराव धरना प्रदर्शन और हंगामा जारी है ऐसे में संविदा पर रखे गए सैनिकों को लेकर एक बहस छिड़ गई है कि वह आपत्ति काल में कितने उपयोगी हैं और क्या वह युद्ध में टिक पाएंगे।

यूक्रेन युद्ध में नहीं टिक पा रहे रूस के संविदा सैनिक:

दुनिया के सबसे मजबूत सेनाओं में से एक रूस की सेना को यूक्रेन ने लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं क्योंकि ज्यादातर सैनिक संविदा सैनिक हैं। ग्राउंड पर उनके पास ऑपरेशन का कोई तजुर्बा नहीं है यही कारण है कि रूस द्वारा जीते गए यूक्रेन के इलाके सैनिक कब्जा नहीं कर पा रहे हैं और रूस के सैनिकों को यूक्रेन के नियमित सैनिक जिन्हें 15 से 20 वर्ष की सैन्य सेवाओं का अनुभव है और प्रशिक्षण है वह आसानी से रूस के सैनिकों को खदेड़ने में सफल हो रहे हैं।

रूस में हो रही संविदा सैन्य सेवाओं की आलोचना:

यूक्रेन युद्ध में ग्राउंड पर रूसी सैन्य बलों की कमजोरी अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है रूस में भी इसकी आलोचना हो रही है यहां पर कहा जा रहा है कि देश में नियमित और पेशेवर फौज खड़ी करने की जरूरत है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सैन्य सेवाओं में इजाफा कर दिया है और अब कम से कम 15 वर्ष के लिए भर्तियां होंगी।

दुनिया भर के विशेषज्ञों का मानना है कि पेशेवर सेनाओं के लिए अग्निपथ योजनाएं घातक हो सकती है। भारत की सेना को दुनिया के सबसे पेशेवर सेना इसीलिए माना जाता था क्योंकि यहां के सैनिक नियमित होते हैं और उन्हें परंपरागत रूप से काला प्रशिक्षण और अनुभव दिया जाता है।

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