23 May 2022, 7:46 AM (GMT)

Global Stats

527,799,496 Total Cases
6,300,434 Deaths
498,043,212 Recovered

May 23, 2022

अवधभूमि

हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार

आबकारी महकमे का एक और कारनामा: नियमों को ताक पर रखकर चेन्नई की कंपनी को दे दिया गया 544 करोड़ का ठेका

लखनऊ। आबकारी महकमे के अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी के संरक्षण में चल रहे गड़बड़ घोटालों का नित नया खुलासा हो रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री सरकारी दुकानों से रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया गया। जिसके लिए 2020 में तत्कालीन आयुक्त गुरुप्रसाद ने दक्षिण भारत की अपनी एक जान पहचान वाली कंपनी को अप्रोच किया लेकिन जब उस कंपनी के ही एक अधिकारी ने गुरु प्रसाद के खेल की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को दी तो उन्हें पीछे हटना पड़ा। इस बीच चेन्नई की एक कंपनी ने संजय भूसरेड्डी को व्यक्तिगत रूप से अप्रोच किया प्रभावित किया जिसके बाद वर्तमान अपर मुख्य सचिव ने कंपनी को पीओएस मशीन खरीद का ठेका देने का आश्वासन दे दिया।

पीओएस मशीन खरीद से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया इतनी दोषपूर्ण रही है कि किसी अन्य सक्षम कंपनियों को इस निविदा में पार्टिसिपेट ही नहीं करने दिया गया। निविदा प्रक्रिया में कुल 3 कंपनियों ने भाग लिया जिसमें चेन्नई की OASYS ने ही धरोहर राशि जमा किया बाकी दो कंपनियों ने अर्नेस्ट मनी नहीं जमा किया इस तरह से इस निविदा को फेयर नहीं माना जा सकता बावजूद इसके संजय भूसरेड्डी और तत्कालीन आबकारी आयुक्त गुरुप्रसाद ने व्यक्तिगत तौर पर रुचि लेते हुए ओएसिस को सफल बोली दाता बना दिया।


आबकारी विभाग ने नकली शराब को रोकने व शराब बनाने वाली कंपनियों की चोरी रोकने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये निर्देश पर एक हजार करोड़ की ट्रैक व ट्रेस परियोजना बनाई थी। जिसके लिए उन्होंने जून २०२० में एक टेण्डर जारी किया जिसकी शर्तें ऐसी जटिल बनाई की जिससे विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी कर सके और जिस कंपनी को टेण्डर देना चाहें दे सकें। विभाग के शीर्ष पर बैठे अधिकारी संजय भूसरेड्डी जो कि खुद दक्षिण राज्य के हैं उन्होंने चेन्नई की एक कंपनी ओएसिस को अक्टूबर २०२० में तमाम मानकों को दरकिनार करके टेण्डर दे दिया। लेकिन आज दो साल होने को आये हैं और अभी तक ओएसिस कंपनी ने अपना काम शुरू नहीं किया। नई सरकार बनने के बाद विभाग ने दिखावे के लिए इसके लगने वाली पॉस मशीनों का डिमान्सट्रेशन आबकारी कार्यालयों में शराब के दुकानदारों को बुलाकर करवाया। टेण्डर की शर्तो व अनुबंध के हिसाब से जिस काम को इस कंपनी ने मार्च २०२१ में शुरू करना था वो अप्रैल २०२२ आने तक अभी तक सिर्फ डेमो कर रही है। जिसमें विभाग की घोर लापरवाही परिलक्षित हो रही है।

पीओएस मशीन नहीं लगने से 2 साल में ही 20 हजार करोड़ का घाटा

इस प्रोजेक्ट की देरी के कारण सरकार को प्रतिवर्ष कम से कम 10 हजार से 15 हजार करोड़ रूपये विभाग को राजस्व का नुकसान अनुमानित है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिस कंपनी को काम दिया गया है। उसने कभी भी इस तरह का काम करने का कोई तजुर्बा नहीं है। सुरक्षा होलोग्राम व्यवस्था को २०१७ में हटाने के बाद क्यूआर कोड हर बोतलों पर लगाया गया वह भी नकाम रहा क्योंकि आये दिन नकली क्यूआर कोड लाखों की संख्या में पकड़े जा रहे हैं और जहरीली सरकार के चक्कर में आम जन की मौत हो रही है लेकिन विभाग अभी तक कोई प्रभावी कार्यवाही करने से बच रहा है।

टेंडर शर्तों का वायलेशन करने के बाद भी कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं

ओएसिस कंपनी को 2020 में ही पीओएस मशीन की आपूर्ति करनी थी लेकिन 2022 लग चुका है अब तक विभाग के अनुज्ञापी ताकि यह मशीन नहीं पहुंची है। टेंडर सरसों का स्पष्ट उल्लंघन करने के बावजूद संजय भूसरेड्डी ने ओएसिस पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की किसी प्रकार का जुर्माना नहीं किया और टेंडर भी निरस्त नहीं किया इससे साफ है कि इस कंपनी से संजय भूसरेड्डी पूरी तरह प्रभावित हैं और अनुचित रूप से पक्ष ले रहे हैं।

राशन की दुकानों पर फेल हो चुका है ओएसिस का पीओएस मशीन

इससे पहले ओएसिस ने उत्तर प्रदेश के राशन की दुकानों के लिए भी पीओएस मशीन सप्लाई की थी लेकिन मशीन तकनीकी रूप से अक्षम साबित हुई और विभाग के लिए सरदर्द बन गई जिसके बाद इस मशीन का इस्तेमाल रोक दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि राशन की दुकानों पर जब तकनीकी रूप से मशीन सक्षम नहीं थी फिर तकनीकी रूप से अधिक जटिल शराब की दुकानों के लिए इस कंपनी की पीओएस मशीन को क्यों चुना गया।

अनुज्ञापियों को पीओएस मशीन लगाने से पहले दी जा रही है चेतावनी और धमकी:

आबकारी महकमे की ओर से सभी जिला आबकारी अधिकारियों को आदेश जारी किया गया है जिसमें पीओएस मशीन की अनिवार्यता और उपयोगिता की बात कही गई है साथ ही इस मशीन को सरकारी संपत्ति बताते हुए किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी होने पर अनुज्ञापी पर ही ₹32000 जुर्माना लगाने की भी चेतावनी दी गई है। समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर मशीन में खराबी आने के बाद उसे बदलने की जगह अनुजापी पर जुर्माना क्यों लगाया जा रहा है।

अनुज्ञापी विभाग की शर्तों का कर रहे विरोध:

लाइसेंसी वेलफेयर एसोसिएशन आबकारी विभाग के इस मनमाने आदेश के खिलाफ विरोध पर उतर आया है उनकी ओर से कहा गया है कि यह लाइसेंसी का उत्पीड़न करने का नया रास्ता खुल गया है। सरकार अपनी कमियों को छुपाने के लिए लाइसेंसी को बलि का बकरा बना रही है।

शर्तो को मानने के लिये अनुज्ञापियों से जबरन लिया जा रहा शपथ पत्र:

ओएसिस की पीओएस मशीन में खामियों की संभावना को देखते हुए आबकारी महकमा अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए लाइसेंसी को बलि का बकरा बनाने की तैयारी कर रही है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि डिवाइस में किसी तरह की कमी आने पर डिवाइस खरीदने वाला विभाग नहीं बल्कि लाइसेंस जिम्मेदार होगा और उसे ₹32000 जुर्माना चुकाना होगा।

आबकारी महकमा अपने आदेश का अनुपालन कराने के लिए प्रत्येक लाइसेंसी से एक शपथ पत्र जबरन ले रहा है

कुल मिलाकर पी ओ एस मशीन की खरीद में बहुत बड़ा घोटाला हो गया है। वह भी तब हुआ है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग में पारदर्शिता पर जोर देने के लिए बड़े सुधार के आदेश दिए थे।