October 3, 2022

अवधभूमि

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नजरिया: तो क्या योगी के करीब आ रहे केशव! आखिर केशव और योगी में क्या खिचड़ी पक रही है:

लखनऊ। शह और मात का खेल दिल्ली और लखनऊ दोनों जगह चल रहा है। भाजपा सुप्रीमो जेपी नड्डा ने जब उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को दिल्ली बुलाकर मुलाकात की थी तो केशव मौर्य का उत्साह और जोश सातवें आसमान पर था । उन्होंने दिल्ली से सटे गाजियाबाद में ही ऐलान कर दिया कि संगठन सत्ता से बड़ा होता है और तब इसके यही मायने निकाले गए थे कि केशव प्रसाद मौर्य अगले प्रदेश अध्यक्ष बनने वाले हैं। खुद केशव प्रसाद मौर्य ने इन अटकलों का खंडन नहीं किया था। तकरीबन 4 दिन बाद भूपेंद्र चौधरी का नाम नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सामने आया जिसके बाद केशव प्रसाद मौर्य सन्न रह गए। उन्हें मालूम हो गया था कि उनके साथ दिल्ली दरबार ने खेल कर दिया। उन्होंने योगी से बिगड़े हुए रिश्ते को पटरी पर लाने के प्रयास में अपने बयान में संशोधन करते हुए कहा कि

सत्ता और संगठन दोनों बराबर होते हैं और दोनों के अपने महत्व है”

उनके इस बयान को योगी आदित्यनाथ के साथ रिश्ते को पटरी पर लाने के एक प्रयास के रूप में देखा गया। इसकी पुष्टि तब हुई जब भूपेंद्र चौधरी के स्वागत सम्मान में योगी आदित्यनाथ के करीब बैठे हुए केशव प्रसाद मौर्य की बॉडी लैंग्वेज पहली बार काफी सकारात्मक दिखाई दी। ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने अपनी मर्जी से योगी मठ ज्वाइन करने की सोच समझकर तैयारी कर ली है। केशव प्रसाद मौर्य जानते हैं कि योगी के बिना उत्तर प्रदेश सरकार में एक पत्ता भी नहीं हिलता ऐसे में लखनऊ में रहकर राजनीति करनी है तो योगी आदित्यनाथ का बनकर रहना पड़ेगा। केशव प्रसाद मौर्य को दिल्ली दरबार के मुकाबले योगी का वफादार बनना फिलहाल फायदे का सौदा लगा। जानकार सूत्रों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के प्रति केशव प्रसाद मौर्य का यह उमड़ा प्रेम अकारण नहीं है दरअसल पंचायती राज मंत्री कैबिनेट के पद से इस्तीफा देने वाले भूपेंद्र चौधरी के विभाग पर केशव प्रसाद मौर्य की निगाहें हैं। उन्हें लगता है कि यदि योगी आदित्यनाथ की कृपा बन जाए तो यह विभाग उन्हें मिल सकता है। इसके अलावा केशव प्रसाद मौर्य तेज तरार आईएएस और ग्र और उन्होंने योगी की कृपा प्राप्त करने की कोशिशें शुरू कर दी है आगे चलकर अगर वह योगी आदित्यनाथ की जय जयकार करते नजर आए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

जानकार सूत्रों का कहना है कि यह प्यार एक तरफा नहीं है। योगी आदित्यनाथ दिल्ली दरबार के उन सभी मोहरों पर अपनी खास निगाहें रखे हैं जो समय-समय पर उनके लिए परेशानी खड़ी करते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि अगर दिल्ली दरबार के मोहरे योगी मठ में शामिल हो जाते हैं तो यहां दिल्ली दरबार का नियंत्रण काफी कमजोर हो जाएगा। फिलहाल लखनऊ और दिल्ली के बीच सियासी दंगल में आने वाले दिनों में बहुत कुछ देखने को मिलने वाला है जिस पर राजनीतिक पंडितों की निगाहें है।