21 Jan 2022, 2:02 AM (GMT)

Global Stats

343,734,663 Total Cases
5,595,496 Deaths
275,191,549 Recovered

January 21, 2022

अवधभूमि

हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार

महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ दिल्ली में कांग्रेस को रैली की इजाजत नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जन आक्रोश से डरी हुई मोदी सरकार ने कांग्रेस की महंगाई हटाओ रैली की अनुमति खारिज कर दी, मगर उसे नहीं मालूम कि राजस्थान की मिट्टी में शौर्य है, खुद्दारी है और जब-जब वीरभूमि राजस्थान की मिट्टी माथे पर लगाकर अन्याय के खि़लाफ़ युद्ध का शंखनाद हुआ है, तानाशाह परास्त हुए हैं।

महंगाई की पर्याय मोदी सरकार का नाम लो तो प्रतिध्वनि आती है – ‘महंगाई और बेरोज़गारी’। मोदी सरकार ने देश के लोगों पर दोहरा प्रहार किया है। एक तरफ़ तो रोजी-रोटी के अवसर छीन लिए गए, दूसरी तरफ़ देश को महंगाई की आग में झोंक दिया।

बीते सात सालों की कारगुज़ारी पर नज़र डाली जाए तो सिर्फ़ और सिर्फ़ ‘‘चंद पूँजीपतियों के लिए मौका’’ और ‘‘देश के लोगों को धोखा’’ ही दिखाई देता है।

पेट्रोल, डीज़ल, दाल, तेल, नमक, सब्जी, सब लोगों की पहुँच के बाहर कर दिए गए हैं।

भाजपा सरकार जब सत्ता में आई थी तो याद कीजिए तब उसे विरासत में कांग्रेस ने सौंपा था ₹400 कीमत की खाना बनाने की गैस, ₹70 लीटर पेट्रोल, ₹56 लीटर डीज़ल, ₹60 दाल, ₹70 खाने का तेल, अर्थात आटा दाल तेल गैस नमक सब देश के लोगों की गृहस्थी की जेब पर बोझ नहीं थी। मगर आज अच्छे दिनों का झाँसा देने वालों ने देश को महंगाई की आग में झोंक दिया है। आज घर का खाना बनाने की गैस ₹1000 पार है, बाज़ार की खाना बनाने की गैस ₹2000 पार है, पेट्रोल-डीज़ल ₹100 पार, खाना बनाने का तेल ₹250 पार है। दाल ₹200 तक पहुँच गई और तो और टमाटर तक टर्रा रहा है, ₹100 किलो के भाव खा रहा है।

मोदी सरकार ने बीते सात सालों में पेट्रोल डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाकर सेस-डिविडेंड इत्यादि से ₹24 लाख करोड़ जनता की जेब से लूटे हैं। यूपीए-कांग्रेस सरकार में पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी मात्र ₹9.20 प्रति लीटर थी, जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर ₹32.90 प्रति लीटर कर दिया। 4 नवंबर के देशभर में हुए उपचुनावों की हार के बाद ₹5 प्रति लीटर पेट्रोल पर एक्साईज़ ड्यूटी कम तो की, पर आज भी पेट्रोल पर एक्साईज़ ड्यूटी ₹27.90 प्रति लीटर है। कांग्रेस-यूपीए सरकार में डीज़ल पर एक्साईज़ ड्यूटी ₹3.56 प्रति लीटर थी, जिसे मोदी सरकार ने 793 प्रतिशत से अधिक बढ़ाकर ₹31.80 प्रति लीटर कर दिया। 4 नवंबर के उपचुनावों की हार के बाद डीज़ल पर एक्साईज़ ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर तो घटाई, पर आज भी यह ₹21.80 प्रति लीटर है, जो कांग्रेस सरकार के मुकाबले में 512 प्रतिशत अधिक है।

मोदी सरकार के हर निर्णय पर नज़र डाली जाए, तो जन विरोधी झलक साफ हैः-

· हाल ही में RBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ‘नोटबंदी और गलत जीएसटी’ से देश के छोटे और मँझोले उद्योग बर्बाद हुए हैं। नोटबंदी के बावजूद ‘कैश इन सर्कुलेशन’ यानि अर्थव्यवस्था में रोकड़ की मात्रा 64 प्रतिशत और बढ़ गई – नोटबंदी से ठीक पहले 4 नवंबर, 2016 को ‘कैश इन सर्कुलेशन’ ₹17.74 लाख करोड़ था, जो 29 अक्टूबर, 2021 को बढ़कर ₹29.17 लाख करोड़ हो गया है। न उग्रवाद मिटा, न नक्सलवाद, उल्टे फर्जी नोटों का फर्जीवाड़ा भी बढ़ गया और अर्थव्यवस्था में ‘ब्लैक मनी’ बेलगाम है।

· हाल में आई ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट’ ने बताया कि भारत में भुखमरी के हालात यह हैं कि हम पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से पिछड़ गए हैं, 116 देशों की लिस्ट में देश 101वें पायदान पर पहुंच गया है।

· दिसंबर 2021 में आई ‘‘विश्व असमानता रिपोर्ट’’ का खुलासा और चौंकाने वाला है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में 10 प्रतिशत धन्ना सेठों के पास देश की कुल आय की 57 प्रतिशत कमाई है। पर निम्न व मध्यम वर्ग 50 प्रतिशत आबादी के पास देश की कुल आय की केवल 13 प्रतिशत कमाई है। यानि अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब।

· हाल ही में मोदी सरकार के NSO की रिपोर्ट में ख़ुलासा हुआ कि देश में किसानों की औसत आमदनी प्रतिदिन मात्र ₹27 रह गई है, जो मनरेगा मजदूरी से भी कम है। दोगुनी आय करना तो दूर, किसान की आय दसियों गुना कम कर दी गई।

· NSO की रिपोर्ट में यह भी चौंकानेवाला तथ्य सामने आया कि देश के किसान पर औसत कर्ज ₹74,000 है। सात साल में मोदी सरकार ने चहेते धन्नासेठों के बैंकों के कर्ज के 10 लाख करोड़ रुपये तो बट्टे खाते में डाल दिए, पर किसान को कर्जमाफी के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं दी।

· लेबर मंत्रालय ने बीते वर्ष अपनी रिपोर्ट में बताया कि 45 वर्षों की भीषणतम बेरोज़गारी देश मे परोस दी गई है। आज भी देश में बेरोजगारी की दर 10प्रतिशत छू रही है।

· हाल ही में ‘ऑक्सफेम’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोरोना महामारी की विभीषिका में भी देश के 100 बड़े मोदी जी के पूँजीपति मित्रों ने 13लाख करोड़ कमाए पर देश के 12 करोड़ मेहनतकश लोगों ने अपना रोज़गार खो दिया। मोदी जी के कई मित्रों की आय तो ₹1000 करोड़ प्रतिदिन बढ़ रही है, पर हमारी गरीब बहनें ₹1000 का सिलेंडर खरीदने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं।

· कांग्रेस-यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में जनकल्याण नीतियों के चलते 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल पाए। इसके विपरीत मोदी सरकार के 7 साल में जनविरोधी नीतियों ने देश के 23 करोड़ लोगों को फिर गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिया।

अर्थात एक बात साफ़ है कि मोदी-भाजपा को चुनाव हराओ, महँगाई से निजात पाओ।

You may have missed