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May 27, 2022

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चुनाव समीक्षा: बसपा का 14% वोट भाजपा के लिये बना संजीवनी: दलित बाहुल्य 139 सीट में 79 पर भाजपा की जीत: बसपा का वोट शेयर 20 से घटकर 9% रह गया

लखनऊ। एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में वापसी की है। चुनाव परिणामों में हालांकि समाजवादी पार्टी ने भी अपने सीटों में दोगुना से ज्यादा इजाफा किया है। राजनीतिक समीक्षक और पंडित इस बात से हैरान रहे कि आखिर भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर के बावजूद प्रचंड वापस कैसे कर ली।

बसपा का वोट बैंक बना संजीवनी

जानकार सूत्रों का मानना है कि कोरोना काल के दौरान एक आंतरिक सर्वे में भाजपा को एहसास हो गया था कि सत्ता विरोधी लहर चल रही है और अगर इसे रोका नहीं गया तो सत्ता में वापसी नामुमकिन है। भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत ही डैमेज कंट्रोल के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी। भाजपा के रणनीतिकारों को लगा कि बेहद कमजोर तबके के लोगों के माध्यम से चुनावी नैया पार लगाई जा सकती है। समाजवादी पार्टी गठबंधन ने जब पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों में अपना आधार बढ़ाना शुरू किया तो भाजपा सतर्क हो गई। चुनाव से 8 महीने पहले भाजपा ने एक आंतरिक सर्वे कराएं जिसमें भाजपा की सीटों की संख्या 100 से कम रह गई। भाजपा की निगाहें पिछली बार 20% शेयर वाले बसपा पर टिकी हुई थी भाजपा तो पता था कि यदि इस वर्ग को साथ लिया जाए तो विपक्ष की घेराबंदी आसानी से तोड़ा जा सकता है।

मुफ्त राशन पर फिदा हुआ दलित वर्ग

चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि मुफ्त राशन का सबसे ज्यादा प्रभाव और फायदा भारतीय जनता पार्टी को दलित बाहुल्य इलाके में देखने को मिला यहां पर दलितों को 70 फ़ीसदी से ज्यादा वोट एक मुश्त भाजपा के खाते में गया। आगरा मेरठ सहारनपुर बुलंदशहर जनपदों में भाजपा ने निर्णायक दलित वोट के सहारे सपा गठबंधन को करारी मात दी।

सपा गठबंधन के खिलाफ जाटव वोट भाजपा के पक्ष में हुआ लामबंद

मायावती ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में जानबूझकर आक्रामक चुनाव प्रचार नहीं किया। उन्हें पता था कि यदि पश्चिमी इलाके में बहुजन समाज पार्टी लड़ाई में आ जाती है तो इसका सीधा फायदा सपा गठबंधन उठा लेगी। एक रणनीति के तहत बहुजन समाज पार्टी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में मात्र आगरा में एक चुनावी रैली की।

पश्चिम में जानबूझ कर दिए कमजोर प्रत्याशी

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने जानबूझकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 110 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के अनुकूल प्रत्याशी दिया। आरोप तो यहां पर लगाया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश प्रत्याशियों का चयन भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के इशारे पर किया गया। बहुजन समाज पार्टी ने प्रश्न उत्तर प्रदेश की जिन 110 विधानसभाओं में अपने कैंडिडेट उतारे उनमें 89 सीटों पर भाजपा को एकतरफा जीत हासिल हुई।

इसके अलावा बुंदेलखंड अवध और पूर्वांचल में भी भाजपा ने उन क्षेत्रों में गठबंधन का सफाया कर दिया जहां बसपा साफ हो गई। महाराजगंज कुशीनगर गोरखपुर गोंडा लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक पर कब्जा करके भाजपा ने सपा गठबंधन का सफाया कर दिया।

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