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June 30, 2022

अवधभूमि

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प्रियंका की रैली में भारी भीड़: सपा और भाजपा खेमे में हलचल: पीतल नगरी को सोने सी चमक मिलेगी: कहा – मैं यहां की बहू, मेरे पति और उनके परिवार को मुश्किल घड़ी में इस धरती ने सहारा दिया

मुरादाबाद। मुरादाबाद में प्रियंका गाँधी की प्रतिज्ञा रैली में उमड़ी लाखों की भीड़

जाति-धर्म की राजनीति नकार कर विकास के मुद्दे पर वोट करें लोग- प्रियंका गांधी

  • मुरादाबाद में प्रियंका गाँधी की प्रतिज्ञा रैली में उमड़ी लाखों की भीड़
  • जाति-धर्म की राजनीति नकार कर विकास के मुद्दे पर वोट करें लोग- प्रियंका गांधी
  • जाति-धर्म के मुद्दे भड़काने वालों से जनता मांगे हिसाब- प्रियंका गांधी
  • बीजेपी की नीतियों ने किसानों से लेकर व्यापारियों तक को बर्बाद किया- प्रियंका गांधी
  • सपा और बसपा ने जनता के मुद्दों पर न कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गाँधी ने उत्तर प्रदेश की जनता से जाति-धर्म की राजनीति को नकारकर विकास के मुद्दे को महत्व देने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जनता उन राजनेताओं को जवाबदेह बनाये जो उनके दुखदर्द से कोई वास्ता नहीं रखते, लेकिन चुनाव के समय जाति या धर्म का झंडा बुलंद करके सत्ता पाने का सपना देखते हैं। आज मुरादाबाद में प्रतिज्ञा रैली में मौजूद विशाल जनसमूह के साथ बेहद आत्मीय रिश्ता जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस आधी आबादी को ताक़त देने में जुटी है जो जाति-धर्म और माफ़िया संस्कृति को राजनीति से साफ करेगी। उन्होंने कहा कि जब जनता राज करने वालों से हिसाब मांगना शुरू करेगी तभी उसका कल्याण होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और बसपा जैसी पार्टियां जनता के मुद्दों पर कभी संघर्ष नहीं करतीं। उत्तर प्रदेश में जनता की लड़ाई  सिर्फ कांग्रेस ने लड़ी है। श्रीमती गाँधी ने अपने भाषण की शुरूआत मुरादाबाद को अपनी ससुराल बताकर की। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद उनके ससुराल के लोग इस शहर में बसे और यहां के लोगों की मदद से उन्होंने अपनी ज़िदगी शुरू की, अपने बच्चों का भविष्य बनाया। तब पीतलनगरी मुरादाबाद और यहां के हुनर का डंका पूरी दुनिया में बजता था क्योंकि कांग्रेस सरकार यहाँ के निर्यातकों, कारीगरों की पूरी मदद करती थी। लेकिन बीजेपी सरकार की नीतियों की वजह से जिस मुरादाबाद में 8 हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय होता था वहाँ पिछले कुछ सालों में सिर्फ 2 हजार करोड़ का व्यवसाय हो रहा है। यहां के तीन लाख कारीगरों की रोजी-रोटी खत्म हो गयी है। नोटबंदी के समय काला धन लाने का वादा किया गया था, पर लोग बरबाद हो गये। जीएसटी ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी। भाजपा सरकार ने पीतल नगरी को अंधेर नगरी में बदल दी जहाँ एक चौपट राजा है। कांग्रेस महासचिव ने बेरोज़गारी की भीषण समस्या का ज़िक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले टीईटी का पेपर लीक हो गया। यह पहली बार नहीं था। अब तक 12 से ज़्यादा परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि नौकरियों के योग्य नौजवान नहीं मिल रहे हैं। इससे सरकार की नौजवान विरोधी नीति समझी जा सकती है। महिलाएँ कितनी मेहनत से अपनी बेटियों को पढ़ाती हैं लेकिन पेपर लीक हो जाता है और नौकरियाँ नहीं मिल पातीं। श्रीमती गांधी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की लखनऊ के व्यापारियों से हुई मुलाकात का ज़िक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पास व्यापारियों से मिलने और उनकी समस्याएं सुनने का वक्त नहीं है। वजह ये है कि यूपी के राजनेताओं को लगता है कि चुनाव के समय वे जाति-धर्म का मुद्दा उठाकर सत्ता हासिल कर लेंगे।
    जब तक जनता जवाबदेही नहीं मांगेगी तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा। जब तक विकास पर बात जनता नहीं करेगी तब तक धर्म जाति की राजनीति चलती रहेगी। जब तक लोग अपने गांव की सड़क, रोजगार और स्वास्थ्य के मुद्दों पर सरकार से जवाब नहीं मांगेंगे तब तक इसी तरह की राजनीति में फंसे रहेंगे। यूपी में आज हर तरफ अपराध और माफिया का राज है। लोगों को इस स्थिति को बदलना होगा। कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गाँधी ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है। छत्तीसगढ़ की सरकार एक उदाहरण है कि कांग्रेस अपनी प्रतिज्ञाओं को कैसे पूरा करती है। ज़रूरत है कि जनता जागरूक होकर अपने मुद्दों पर लड़े। किसानों का आंदोलन इसका प्रमाण है कि जब लोग संघर्ष के लिए एकजुट होते हैं तो सरकार को झुकना पड़ता है। लेकिन अफसोस की बात है कि आंदोलन में 700 से अधिक किसान शहीद हुए, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने उनके लिए संसद में 2 मिनट का मौन भी नहीं रखा। संसद में चर्चा नहीं की कि कृषि कानून क्यों लाये थे जिन्हें रद्द कर रहे हैं। लखीमपुर खीरी में नरसंहार हुआ। मंत्री के बेटे ने किसानों को अपनी जीप के पहियों के तले  कुचल कर मार डाला। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगीजी ने एक शब्द नहीं बोला। प्रियंका गाँधी ने बीजेपी सरकारों पर तीखी हमला बोलते हुए कहा कि गन्ना किसानों का चार हजार करोड़ का बकाया बीजेपी सरकार नहीं दे रही है लेकिन कोरोना काल में मोदी जी ने आठ हजार करोड़ का हवाई जहाज अपने लिए खरीद लिया। आज यूपी में किसान खाद की लाइन में मर रहे हैं पर सरकार को चिंता नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की प्रतिज्ञाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर छत्तीसगढ़ की तरह 2500 ₹ क्विंटल की दर से धान और गेहूं खरीदा जायेगा। गन्ना 400 रुपये क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। कोरोना काल का बिजली बकाया माफ होगा और बिजली बिल हाफ किया जाएगा। कोरोना काल में आर्थिक रूप से बदहाल होने वाले गरीब परिवारों को 25 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए चुनाव में 40 फीसदी टिकट उन्हें दिये जायेंगे। छात्राओं को स्मार्टफोन और स्कूटी दिया जाएगा ताकि वे सशक्त हो सकें। आज महिलाओं का हर तरफ शोषण हो रहा है लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है। कांग्रेस महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर उनकी आवाज़ बनेगी। 50 फीसदी आबादी को साथ लिए बिना समाज का भला नहीं हो सकता। आरक्षण के प्रावधानों के तहत कांग्रेस सरकार नौकरियों में भी महिलाओं को 40 फीसदी भागीदारी देगी। प्रियंका गाँधी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी सफाई कर्मचारियों के साथ फोटो खिंचवाते हैं पर जब आगरा के अरुण बाल्मीकि को हिरासत में मारा जाता है या हाथरस में दलित की बेटी से बलात्कार होता है तो चुप रहते हैं। हाथरस में बेटी की चिता बिना परिजनों की इजाजत के जला दी जाती है पर मोदी जी और योगी जी चुप रहते हैं। जनता को उनसे हिसाब मांगना चाहिए। किसानों को खालिस्तानी से लेकर देशद्रोही और आंदोलनजीवी कहने वाले आज माफी की बात कर रहे हैं, पर उन्हें माफ क्यों किया जाये। उनसे हिसाब मांगा जाएगा। कोरोना काल में जो बर्बादी हुई, उसका हिसाब मांगिये। कांग्रेस महासचिव ने आज की रैली में सपा और बसपा की राजनीति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सपा की राज में गुंडई और बसपा के राज में हुई लूट को भुलाया नहीं जा सकता। बीजेपी धर्म की राजनीति करती है तो ये जाति की राजनीति के सहारे सत्ता में आना चाहती हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नारे- ‘‘आ रहे हैं अखिलेश’’ पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब सीएए-एनआरसी का आंदोलन चल रहा था, या बिजनौर में नौजवान को पुलिस ने गोली मार दी थी तो अखिलेश कहां थे? जब कांग्रेस के 18 हजार कार्यकर्ता जेल में थे, पार्टी अध्यक्ष अजय लल्लू जी जेल में थे तब अखिलेश कहां थे? हाथरस और फाफामऊ में दलितों की हत्या और बलात्कार हुआ तब बसपा के नेता कहां थे, उन्होंने आवाज़ क्यों नहीं उठायी? क्योंकि सब सोचते हैं कि जनता की पीड़ा से उनकी राजनीति का कोई मतलब नहीं है। सोचते हैं कि जाति और संप्रदाय के नाम पर वोट ले लेंगे। ये सोच जनता को बदलवानी है। किसानों की शहादत ने ये देश बनाया है। हमारे पूर्वजों ने संघर्ष करके आज़ादी दिलायी। इसमें जनता से मजबूत कोई नहीं है। कोई ऐसी जंग नहीं है जो बिना लड़े जीती जाती हो। जो कह रहे हैं कि हम जीतेंगे वे जब लड़ ही नहीं