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अवधभूमि

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यूपी में जंगलराज: लखनऊ क्राइम ब्रांच ने पहले छात्र का अपहरण किया फिर 40 लाख की फिरौती वसूली: क्राइम ब्रांच पर डकैती का मुकदमा दर्ज करने का आदेश

लखनऊ।

लखनऊ के 8 पुलिस-वालों पर डकैती की एफआईआर, छात्र, उसके मामा व दोस्तों से 40 लाख वसूलने का आरोप

लखनऊ। पुलिस कमिश्नरी के डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच में तैनात आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ काकादेव थाना कानपुर में डकैती समेत अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप है कि बीबीए छात्र, उसके मामा व दोस्तों को उठाकर फर्जी मुकदमें में जेल भेजने की धमकी देकर 40 लाख रुपए वसूले गये थे। दबिश के दौरान घर से जेवरात भी लूट ले गए थे। शिकायत होने पर तीनों के खिलाफ गोमती नगर थाने में जुआ अधिनियम में एफआईआर दर्ज करके जेल भेजा गया था। कानपुर और लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित कोर्ट गया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दरोगा रजनीश वर्मा, सिपाही देवकी नंदन, संदीप शर्मा, नरेंद्र बहादुर सिंह, राम निवास शुक्ला, आनंद मणि सिंह, अमित लखेड़ा व रिंकू सिंह पर डकैती, धमकी देने, गाली गलौज करने समेत अन्य गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज करने के बाद काकादेव इंस्पेक्टर ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शास्त्री नगर कानपुर के रहने वाले मयंक बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। मयंक के मुताबिक 24 जनवरी 2021 की शाम अपने दोस्त जमशेद व आकाश गोयल के साथ काकादेव में चाय पी। जब मयंक व आकाश वहां से घर के लिए चले तो डबल पुलिया के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (यूपी 32 एलई 2282) और बिना नंबर वाली नीले रंग की टाटा सूमो गोल्ड वहां आकर रुकी। इसमें डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मी मौजूद थे। आरोप है कि पुलिसकर्मी मयंक व आकाश गोयल को कार में उठा ले गए। लखनऊ कैंट थाने में मारा पीटा। फिर यहां से हजरतगंज में मयंक के मामा के घर जाकर दुर्गा सिंह को उठा लिया। फिर कोचिंग संचालक शमशाद को लेकर फिर कैंट थाने आते हैं। टॉर्चर करने के बाद 25 जनवरी के तड़के करीब साढ़े तीन बजे इन सभी को लेकर पुलिसकर्मी मयंक के घर पर दबिश दिये। आरोप है यहां से तीस हजार रुपये की नकदी व एक हार का सेट लिये इसके बाद फिर लखनऊ ले आये।
आरोप है कि पुलिस वाले छोड़ने के बदले में 1 करोड़ रुपए की मांग किये। इसके बाद 40 लाख रुपए में सेटलमेंट की बात तय हुई। उसी दिन सुबह परमट चौराहे पर पुलिसकर्मी यह रकम लेते हैं। जब इसकी शिकायत तत्कालीन डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से की गयी तो इसकी भनक आरोपी पुलिसकर्मियों को लगी, जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी साजिश के तहत दुर्गा सिंह, मयंक सिंह, शमशाद अहमद, मुस्ताक, आकाश गोयल पर गोमती नगर जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाकर 23 लाख रुपये की रिकवरी दिखा दिये।

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