October 5, 2022

अवधभूमि

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टीकरमाफी में हुआ साधु संतों का महाकुंभ, बाल्मीकि रामायण पारायण तथा पंच महादेव की विग्रह स्थापित

अमेठी। स्वामी परमहंस की तपोभूमि टीकरमाफी में देश दुनिया के संतों महात्माओं आचार्य वेद पुराण उपनिषद के ज्ञाता और मनीषियों का संगम हुआ।

टीकरमाफी पीठाधीश्वर स्वामी हरी चैतन्य ब्रह्मचारी जी के संयोजन में यहां विराट आयोजन हुआ। बाल्मीकि रामायण का पाठ हुआ पंच महादेव विग्रह की स्थापना हुई नवचंडी यज्ञ हुआ और विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजारों लोगों ने अपनी सहभागिता दिखाई।

वेदों का जनक है वाल्मीकीय रामायण, रिद्धि-सिद्धि से मुक्ति- विद्या भास्कर – स्वामी रामानुजाचार्य

अमेठी।श्रीमत परमहंस आश्रम टीकरमाफी परिसर मे देवी देवताओ के पंच बिग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पर वाल्मीकीय रामायण कथामृत पान के पांचवे दिन समापन हुआ। श्रीमत परमहंस सेवा समिति के तत्वावधान मे लब्धप्रतिष्ठ, राजनेताओ, शासन प्रशासन के अधिकारियो सहित देश के अनेक श्रद्धालुओ का समागम संगम हुआ।
ख्यातिलब्ध कथावाचक जगतगुरु रामानुजाचारय स्वामी वासुदेवाचारय जी महराज “विद्याभाष्कर”के मुखरविन्द संगीतमय कथा को सुनाते हुए कहा कि भरत पर अयोध्या के सन्त भी शंका करने लगे। कि राज्य गददी पाने के राम जी को बनबास भेज दिए। भरद्वाज ने कहा कि आप भी सोच रहे। भरत जी के राम जी स्नेही है। राम जी सोचते है कि चित्रकूट मे राम जी पहुचे। भरत जी राम के अनुरागी है। भरत भरद्वाज से पूछा कि राम जी कहा है। लक्ष्मण जी सेमल के पेड पर चढकर देखा। कि भाइया ध्वनि के ऊपर डोरी चढा लीजिए। कवच बाध ले। कैकयी के पुत्र भरत आ रहे है। राम जी ने कहा क्या हुआ। आखिर धनुष की जरूरत है। जब भरत जी आ रहे है। धनुष, तलवार की क्या जरूरत है। लक्ष्मण को राज्य दे दो। भरत के चेहरे पर शिकन नही आयेगी। अयोध्या की जनता रो रही है। सब कुछ जान देते है। राम, लक्ष्मण, भरत, शतुध्न सब एक दूसरे जान देते है। पिता, माता, गुरु देवै भाव। सामान्य धर्म है। माता, पिता, भाई, आप सब राघव है। चित्रकूट मे भरत जी कहते है। राम जी नही रहे। सीता ससुर बिहान हो गये। लक्ष्मण जी पिता बिहान हो गये। पिता का धर्म नही देख रहे राम जी कहते है। महराज दशरथ को पता है कि लक्ष्मण के रहते है राम को कुछ नही होगा। राम ने बताया कि पूर्ब और उत्तर दिशा मे ढाल है। ऐसी जमीन पर घर बना ले लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। राम जी वही करते जो दशरथ कहते है। ।लक्ष्मण जी कहते है। कि अयोध्या को पता चले कि राजा पग्गल घोषित जेल मे डाल दो। राजा दशरथ जी कहते है तो लक्ष्मण वही करते है। बेद का अवतार वाल्मीकीय रामायण है ।सीता जी अपने देवर ससुर मानती है मै सब कुछ करूगा। चौकीदारी करूगा। राम ने कहा क्या करे। आप सीता जी के साथ भ्रमण करे। जगत मे बिचरण करने वाले साधू है। धनी दान ना करे। ब्राह्मण भ्रमण ना करे। उसका जीवन ब्यर्थ है। एक शब्द निकल गया। शिव को ले ले एक दूसरे से मिले। वेद, उपनिषद मे अर्थ मिल जाता है। आपके कल्याण के लिए काम हुए। राहु, केतु, गणेश, हनुमान मंदिर मे आ जाए। एक साधे ,सब साधे ।भरत ने कहा कि अयोध्या का राज्य सम्भाले। इस मौके पर चित्रकूट मे अपसारा आ गई। भरद्वाज के आश्रम मे अलौकिक दृश्य देखे। राम और भरत मे शास्त्रार्थ हुए कि लोग देखकर दंग रह गए। पिता युवराज वनाने के बात कही। राम जी ने कहा कि दुनिया गाली देगे। भरत को राज, राम को चौदह वर्ष का बनवास दिए है। पिता के विरुद्ध बोले वरदहस्त नही होगा। मै आपका भाई है। दास है। मेरे आने का मूल्य नही है। चौदह वर्ष बाद नही आये। तो जान दे दूंगा। चारो पुत्र अपने काम मे लगे रहे ।इन्द्र, बृहस्पति,सब के काम होगा। झरना बहने लगे। नदी बहने लगी। लासे को पान करेगा। कोकिला की आवाज सुनाई देने लगी। अब चित्रकूट नही रहूगा। भरत जी हमसे मिले। कलश अभिषेक के लिए लाए। भरत कूप का पानी सब सूख रहे है। गंगा प्रदूषण बढ रहा है। करोडो खर्च हुए। विश्वविद्यालय से आईएएस पढकर आए है। क्या करेगे। मोदी हो सकते है कुछ कर पाये। अयोध्या का राज्य” राम की खड़ाऊ “सिहासन पर बिराजमान है।नारद ने वाल्मीकीय जी बताए। शिवजी जाटाओ मे गंगा की उतारी। जटा कयै कटाह मे गंगा नाच गयी। भगीरथ जी परेशान है। तपस्या किये शिव जी प्रसन्न हो गये। तब गंगा जी को जैमिन ऋषि ने पी लिए। फिर कान से जैमिन ऋषि ने कान से गंगा निकली। कथा मे अन्तर कथा है। बेद का बाप वाल्मीकीय रामायण है।रिद्धि सिद्धि से मुक्त से पूर्ण होने वाली है ।मुख्य यजमान पंडित अवधेश नारायण पाण्डेय, कमलेश पाण्डेय रहे। स्वामी 1008श्री हरि चैतन्य ब्रह्मचारी महराज, स्वामी हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी महराज की सान्निध्य मे वाल्मीकीय रामायण का आयोजन किए गए।
इस अवसर पर जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र, पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह, डी आई जी पी के पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी, जिला पंचायत अमेठी अध्यक्ष राजेश कुमार अग्रहरि, बिधायक पूर्व मंत्री बिनोद कुमार सिंह, एमएलसी शैलेन्द्र प्रताप सिंह, प्रोफेसर डॉ राम किशोर शास्त्री, डॉ राधेश्याम तिवारी, कांग्रेस किसान अमेठी जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश दूबे, यज्ञ नारायण उपाध्याय, सतीश शुक्ल, अजय कुमार पाण्डेय, प्रहलाद शुक्ल,जगन्नाथ पाण्डेय, दण्डी स्वामी,साधु सन्त, बीस हजार नर, नारी आदि वाल्मीकीय रामायण कथामृत पान मे शमिल रहे।