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December 2, 2021

अवधभूमि

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राजा भैया आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर, 50 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की अटकलें, भाजपा के कई विधायक भी उनके संपर्क में

लखनऊ। राजा भैया के जन आशीर्वाद यात्रा का तीसरा चरण आज से शुरू हो रहा है। लगभग 10:00 बजे लखनऊ से यह यात्रा औरैया इटावा आगरा होते हुए अलीगढ़ तक पहुंचेगी।

राजा भैया की इस जनादेश यात्रा पर लखनऊ के सियासी गलियारों में खासी चर्चा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की निगाहें भी राजा भैया की जनादेश यात्रा पर है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि राजा भैया की यात्रा में उमड़ रही भीड़ भाजपा की परेशानी बढ़ा रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि भाजपा के कई विधायक एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए राजा भैया की पार्टी से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। पश्चिम में मिहिर भोज किस जाति के मुद्दे पर नाराज राजपूत राजा भैया का स्वागत के लिए बेकरार है। इसकी तफ्तीश लखनऊ तक महसूस की जा रही है। माना जा रहा है कि कम से कम पश्चिम की 50 सीटों पर राजा भैया अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं। फिलहाल पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा जिनका भी टिकट काटेगी ज्यादातर लोग राजा भैया की पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं।

भाजपा का समीकरण बिगाड़ सकते हैं राजा भैया:

पश्चिम में किसान आंदोलन और राजपूतों की नाराजगी का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए जनसत्ता दल बड़ी चुनौती बन सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि राजा भैया अन्य दलों के मुकाबले भाजपा के वोट बैंक में आसानी से सेंध लगा सकते हैं। राजा भैया की विचारधारा में हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट है और उनके पिता राजा उदय सिंह राष्ट्रीय स्तर पर बड़े हिंदू नेता माने जाते हैं। गाजियाबाद दादरी अलीगढ़ मेरठ औरैया इटावा जहां पर राजपूतों की अच्छी खासी तादाद है वहां राजा भैया की लोकप्रियता चरम पर है। फिलहाल राजा भैया अपनी पार्टी को स्थापित करने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं और उन्हें उचित प्रतिफल भी मिल रहा है लोग जुड़ रहे हैं यह किसी के लिए घाटे का सौदा हो सकता है लेकिन फिलहाल राजा भैया के नेतृत्व वाले लोकतांत्रिक जनसत्ता दल के लिए अच्छे दिन हैं।

राजनीति में खेल बनाने वाला ही नहीं खेल बिगाड़ने वाला भी खिलाड़ी माना जाता है:

राजा भैया अच्छी तरह जानते हैं कि राजनीति में युद्ध में और प्यार में सब कुछ जायज है। अगर उनकी नई नवेली पार्टी दिग्गजों को हराने में सक्षम हो जाए भले न जीत पाए तो भी उनकी धमक शिद्दत से महसूस की जाएगी। राजा भैया के पास खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन उनकी पार्टी की वजह से बहुत से लोगों का खेल बिगड़ जाएगा। और राजनीति में इसे भी जीत की तरह देखा जाता है। फिलहाल उनकी ओर से यह इशारा मिला है कि वह किसी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर इच्छुक नहीं है और कम से कम 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे।