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गैर दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को चुन-चुन कर निशाना बना रहे संजय भूसरेड्डी: sc-st अधिकारियों पर गंभीर आरोप के बावजूद कार्रवाई नहीं

लखनऊ। अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी केवल घपले घोटाले के लिए ही सुर्खियों में नहीं है बल्कि उनके द्वारा एससी एसटी अधिकारियों और कर्मचारियों का खुला पक्षपात करने तथा ओबीसी और सामान्य वर्ग के अधिकारियों का उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप है।

आरोपों में दम इसलिए भी है क्योंकि ओबीसी और सामान्य वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कुल 77 प्रकरण संजय भूसरेड्डी के स्तर से लंबित है और इनमें कोई भी प्रकरण संजय भूसरेड्डी जानबूझकर निस्तारित नहीं कर रहे हैं। कई अधिकारियों को निलंबित कर घर बैठा रखा है जबकि कई प्रकरण ऐसे हैं जिसमें उच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद पत्रावली निस्तारित नहीं हो रही है।

मेरठ में नकली शराब पीने के प्रकरण में दर्जनों मौत पर जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार को केवल इसलिए बचाया गया क्योंकि वह अनुसूचित जाति से बिलॉन्ग करते हैं जबकि उपायुक्त डॉक्टर पटेल जोकि पिछड़ी जाति से संबंधित है उन्हें निलंबित कर चार्ज सीट दे दी गई। जबकि मेरठ जिले में जहरीली शराब प्रकरण में कई वारदात हुई और कई लोग मर गए उसके बावजूद भी जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार पर कोई भी अधिकारी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सका केवल संजय भूसरेड्डी के डर के कारण।

ओबीसी और सामान्य वर्ग के जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की पत्रावली जानबूझकर संजय भूसरेड्डी के स्तर से लंबित रखी गई है उसकी सूची इस प्रकार है:

सूची पर गौर करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि ओबीसी और सामान्य वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों के साथ संजय भूसरेड्डी कितना क्रूर व्यवहार करते है। पिछले दो-तीन सालों से लगभग 77 प्रकरण जानबूझकर शासन स्तर पर लंबित रखा गया है ताकि पीड़ित अधिकारी और कर्मचारी बहाल न हो सके और आगे की कार्रवाई के लिए अदालत की शरण भी ना ले सके।

72 जनपद में 30 जनपदों में केवल sc-st कैटेगरी के ही जिला आबकारी अधिकारी

आबकारी विभाग में पक्षपात और उत्पीड़न का आलम यह है कि जब से संजय भूसरेड्डी आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव बने हैं ज्यादातर जनपदों में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति कैटेगरी के जिला आबकारी अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक कुल 72 जनपदों में 30 जनपदों में जाति विशेष के लोगों की तैनाती की गई है और जब एससी एसटी कैटेगरी के अधिकारी नहीं मिले तभी दूसरे वर्ग के लोगों को जिला आबकारी अधिकारी बनाया गया।

सामान्य वर्ग के अधिकारियों को नहीं दी जाती मुख्य पदों पर तैनाती

जब से संजय भूसरेड्डी आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में तैनात हुए हैं उन्होंने एक अघोषित पालिसी बना रखी है कि सामान्य या पिछड़े वर्ग के लोगों को मुख्य पोस्टिंग नहीं दी जाएगी। एक सूचना के मुताबिक सामान्य और पिछड़े वर्ग के 70% से ज्यादा अधिकारी

जिनको इन्हें हतोत्साहित करना रहता है उनकी तैनाती प्रवर्तन, एसएसएफ या लॉ में कर दी जाती है।

गैर दलित निरीक्षक या अधिकारियों की तैनाती बंद पड़ी असवनियो या कोर्ट के पैरोकार के तौर पर की जाती है जबकि मुख्य पदों पर ज्यादातर तैनाती एससी एसटी कैटेगरी के लोगों की ही की जाती है।

सामान्य वर्ग के ज्यादातर अधिकारी या तो सस्पेंड है या फिर मुख्य पोस्टिंग से बाहर

आबकारी महकमे में भेदभाव कितने चरम पर है इसका उदाहरण देखना हो तो जनपदों में या डिस्टलरी में जिन अधिकारियों की तैनाती हुई है अगर उन पर गौर करेंगे तो पता चलेगा कि ज्यादातर गैर दलित अधिकारी और कर्मचारी या तो निलंबन जांच का सामना कर रहे हैं या फिर उन्हें मुख्य पोस्टिंग से बाहर रखा गया है।