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निजीकरण के चलते तबाह हुआ श्रीलंका: दाने-दाने को मोहताज हुए लोग: गृह युद्ध रोकने को तैनात की गई सेना

कोलंबो। जरूरी सामानों के दाम आसमान तक पहुंच जाने के बाद जगह-जगह सेना की तैनाती कर दी गई है।

पूरे देश में तबाही का आलम यह है कि पेट्रोलियम पदार्थों की भारी किल्लत पड़ गई है। प्रशासन आवश्यकता के सापेक्ष मात्र 20% ही डीजल और गैस की आपूर्ति कर पा रही है। पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल है पेट्रोल पंप और एलपीजी दीपों के सामने हजारों लोगों की लंबी कतारें हैं।

बाजारों में भी घरेलू इस्तेमाल के ज्यादातर वस्तुओं की किल्लत है। दवा ब्रेड दूध सब्जियां अंडे इनके दाम 50 गुना तक बढ़ गए हैं। चावल के गोदामों में चोरी और लूट की घटनाएं बढ़ गई हैं। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए देश में जगह-जगह पर सेना की तैनाती की गई है।

डीजल-पेट्रोल के अलावा श्रीलंका में खाने-पीने की जरूरी चीजों की भी किल्लत हो चुकी है. स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सरकार के सामने आर्थिक आपातकाल (Economic Emergency) लगाने की नौबत आ गई है. श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) समाप्त होने की कगार पर है और करेंसी (Sri Lankan Rupees) की वैल्यू रिकॉर्ड निचले स्तर पर है. अभी हाल यह है कि देश में चावल और चीनी की भी किल्लत हो गई है. इन सबके ऊपर अनाज की जमाखोरी समस्या को और विकराल बना रही है. (Photo: Reuters)

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