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January 24, 2022

अवधभूमि

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लूटते रहे अपर मुख्य सचिव: नतमस्तक रहा विभाग: बिना टेंडर अट्ठारह सौ करोड़ रुपए का ठेका विजन इंडिया को कैसे मिला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग के आला अधिकारियों के लिए किस तरह सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हुआ। इसकी परत दर परत खुलासा हो रहा है।

बिना टेंडर अट्ठारह सौ करोड़ रुपए का वर्क आर्डर विजन इंडिया को कैसे मिला

ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज सिंह के जाल में भोली भाली महिलाएं फस गई। बैंक सखियों को मिलने वाली डिवाइस जो बाजार में ₹8000 तक में उपलब्ध है वही डिवाइस विजन इंडिया के माध्यम से समूहों को ₹31000 में खरीदने के लिए मजबूर किया गया।

मजे की बात यह है कि पूरा वर्क आर्डर बिना किसी टेंडर के मनोज सिंह के इशारे पर विजन इंडिया को दिया गया।

होते रहे घपले और घोटाले

प्रमुख सचिव मनोज सिंह और प्रबंध निदेशक भानु चंद्र गोस्वामी गरीब महिलाओं के लिए आए हुए फंड को लूटते रहे और पूरा विभाग उनके सामने नतमस्तक रहा।

लंबी डील के बाद विजन इंडिया का चयन हुआ

सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में विभाग के मंत्री तक को भी खबर नहीं थी। पूरा निर्णय मनोज सिंह ने अपने स्तर से लिया। कहां जा रहा है कि कंपनी के डायरेक्टर काफी दिनों से अपर मुख्य सचिव के आवास और बंगले पर देखे जा रहे थे।

क्या सीएजी करेगी इस घपले की जांच

आखिर किन परिस्थितियों में विजन इंडिया के महंगे डिवाइस खरीदे गए। डिवाइस खरीद के लिए टेंडर क्यों नहीं जारी किए गए। और इस कंपनी से अपर मुख्य सचिव का क्या संबंध है इस मामले की जांच हुए बिना घोटाले का अंतिम सच बाहर आना मुश्किल है।