September 30, 2022

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सत्य और अहिंसा के आधारस्तंभ है सम्राट अशोक – dr शिव मूर्ति मौर्य

प्रतापगढ़ । समन्वय सेवा संस्थान प्रतापगढ़ के बैनरतले सम्राट अशोक महान की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी। तथा धम्म् बंधुओ द्वारा साधना की गयी।
सम्राट अशोक पुस्तकालय मे हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता लीलावती ने और संचालन राकेश कनौजिया ने किया।
मुख्य अतिथि के रुप मे डा.शिवमूर्ति मौर्य ने कहा कि अशोक अहिंसा, शान्ति तथा लोक कल्याणकारी नीतियों के विश्‍वविख्यात तथा अतुलनीय सम्राट हैं। एच. जी. वेल्स के अनुसार अशोक का चरित्र “इतिहास के स्तम्भों को भरने वाले राजाओं, सम्राटों, धर्माधिकारियों, सन्त-महात्माओं आदि के बीच प्रकाशमान है और आकाश में प्रायः एकाकी तारा की तरह चमकता है
संचालन करते हुए राकेश कनौजिया ने कहा कि सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकारने के बाद उन्होंने उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी किया। उन्होंने शिकार तथा पशु-हत्या करना छोड़ दिया। उन्होंने सभी सम्प्रदायों के सन्यासियों को खुलकर दान देना भी आरंभ किया। और जनकल्याण के लिए उन्होंने चिकित्सालय, पाठशाला तथा सड़कों आदि का निर्माण करवाया।
उमेश कनौजिया ने बताया कि सम्राट अशोक के चार मुखी शेरों का थाईलैण्ड में पाया गया शिल्प उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए धर्म प्रचारकों को नेपाल, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, मिस्र तथा यूनान भी भेजा। इसी कार्य के लिए उसने अपने पुत्र एवं पुत्री को भी यात्राओं पर भेजा था। अशोक के धर्म प्रचारकों में सबसे अधिक सफलता उसके पुत्र महेन्द्र को मिली। महेन्द्र ने श्रीलंका के राजा तिस्स को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया, और तिस्स ने बौद्ध धर्म को अपना राजधर्म बना लिया और अशोक से प्रेरित होकर उसने स्वयं को ‘देवनामप्रिय’ की उपाधि दी।
सी.पी.राव ने कहा कि सम्राट अशोक ने अहिंसा का मार्ग अपना कर एक शान्ति का संदेश दिये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही लीलावती ने कहा कि सम्राट अशोक ने अशोक अहिंसा, शान्ति तथा लोक कल्याणकारी नीतियों के विश्‍वविख्यात तथा अतुलनीय सम्राट हैं। एच. जी. वेल्स के अनुसार अशोक का चरित्र “इतिहास के स्तम्भों को भरने वाले राजाओं, सम्राटों, धर्माधिकारियों, सन्त-महात्माओं आदि के बीच प्रकाशमान है और आकाश में प्रायः एकाकी तारा की तरह चमकता थे।
कार्यक्रम मे राम पियारी,सालिक राम मौर्य,अनीता मौर्य,गंगाराम मौर्य, विजय कुमार मौर्य,दिनेश कुमार, ओम प्रकाश, रामलाल मौर्य, महेश मणि,सूर्यबली,महरानी दीन, विकास मौर्य, बसंतलाल मौर्य,प्रताप बहादुर चौधरी,प्रशांत जी,विजय शंकर जी उपस्थित रहे।

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