October 3, 2022

अवधभूमि

हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार

नजरिया: क्या पीएफआई पर छापेमारी कर भारत जोड़ो यात्रा को विफल करने की साजिश रच रही है भाजपा: यह संयोग नहीं प्रयोग है

नई दिल्ली। राहुल गांधी ने 15 दिनों में 325 किलोमीटर की भारत जोड़ो पैदल यात्रा तय कर भाजपा को चिंता में डाल दिया। बीजेपी ने राहुल गांधी का मजाक बनाने के लिए पहले उनके टी-शर्ट को लेकर बखेड़ा खड़ा किया लेकिन जब जवाबी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के 1000000 रुपए वाले लहंगे सूट को मुद्दा बनाया तो बैकफुट पर चले गए। स्मृति ईरानी ने कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद के स्मारक पर राहुल के नहीं जाने की बात कही तो कांग्रेस ने तुरंत ही राहुल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जिसमें वह विवेकानंद की मूर्ति के सामने आशीर्वाद प्राप्त करने की मुद्रा में देखे गए इसकी वजह से बीजेपी और स्मृति ईरानी की बड़ी फजीहत हुई। एक मुस्लिम बच्ची को लेकर संबित पात्रा ने ट्वीट किया जिसके बाद कांग्रेस आईटी सेल ने संबित पात्रा की जालीदार टोपी वाली कई तस्वीरें पोस्ट कर उन्हें खामोश कर दिया। इस बीच राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मे लोगों का हुजूम उड़ने लगा और यात्रा कोच्चि तक पहुंच गई। अब जबकि यात्रा भाजपा शासित कर्नाटक में पहुंचने वाली है बीजेपी बेचैन हो गई हो गई है। भाजपा ने भारत जोड़ो यात्रा को डिस्टर्ब करने के लिए पीएफआई के खिलाफ छापेमारी शुरू कर दी। जानकार बताते हैं कि छापेमारी संयोग नहीं बल्कि एक प्रयोग है। भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि पीएफआई की छापेमारी के दौरान कई निर्दोष लोगों को पकड़ा जाएगा जिसके बाद मुस्लिम समाज सड़क पर आ जाएगा और तुरंत ही हिंदू मुस्लिम की बहस छिड़ जाएगी। इस बहस में भारत जोड़ो यात्रा चर्चा से बाहर हो जाएगी।

बीजेपी की मुश्किल केंद्र सरकार के किसी भी कदम को लोग राजनीति से प्रेरित समझने लगे हैं

भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अब केंद्र सरकार द्वारा मदरसों मस्जिदों या मुस्लिम संगठनों पर जो भी कार्रवाई हो रही है उसे लोग राजनीति से प्रेरित मानने लगे हैं। ऐसी दशा में केंद्र सरकार के ऐसे किसी कदम का भाजपा फायदा नहीं उठा पा रही है। पीएफआई पर छापेमारी का मामला यदि तूल नहीं पकड़ पाया और लोगों ने इसे राजनीति से प्रेरित मानकर खारिज कर दिया तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं वही अगर तमिलनाडु और केरल की तरह कर्नाटक में राहुल को जनता का समर्थन मिला तो भाजपा के मिशन 2024 के लिए चुनौतियां निश्चित रूप से बढ़ जाएंगी।