October 4, 2022

अवधभूमि

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हम अपने दम पर बॉर्डर क्रास कर रहे हैं, हमारी सरकार कोई मदद नहीं कर रही है

कानपुर। यूक्रेन से कानपुर लौट कर आई शताक्षी सचान ने वहां की त्रासदी बयान करते हुए रो पड़ी। शताक्षी ने कहा की बॉर्डर तक पहुंचना ही सबसे बड़ी मुसीबत है। सभी देश के लोगों ने यूक्रेन सरकार से बात कर अपने लोगों को बॉर्डर तक पहुंचाने में मदद की और वहां से समय रहते लोगों को निकाल लिया लेकिन हमारी सरकार हमारे ईमेल और फोन कॉल का जवाब भी नहीं दे रही थी। भारतीय दूतावास ने हमारी कोई मदद नहीं की। भारी गोलाबारी में अपनी जान जोखिम में डालकर हम किसी तरह बॉर्डर पर किए। सरकार द्वारा भेजे गए चार केंद्रीय मंत्रियों को लेकर जब सवाल किया गया तो शताक्षी ने कहा कि बॉर्डर पार करने में इन लोगों ने कोई मदद नहीं की।

शताक्षी के अनुसार यूक्रेन के कई शहरों में अभी 15 हजार से ज्यादा छात्र फंसे हुए हैं उनके पास ना तो खाना बचा है और न पीने को पानी मिल पा रहा है हमारी सरकार उनकी कोई मदद नहीं कर रही है।