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July 7, 2022

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पेट्रोलियम पदार्थों पर एक्साइज कम करने के बाद हुए घाटे की भरपाई के लिए एक लाख करोड़ रुपए का कर्ज लेगी केंद्र सरकार

नई दिल्ली। चुनाव के दबाव में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटा कर जो राहत दी है वह लोगों पर भारी पड़ने वाली है। दरअसल केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करने से जो लगभग एक लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा उसकी भरपाई के लिए कर्ज लेने जा रही है।

पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करके मोदी सरकार ने आम जनता को तो तात्कालिक तौर पर राहत तो दे दी है, लेकिन सरकार को यह राहत इतनी महंगी पड़ रही है कि घाटे की भरपाई के लिए  करीब एक लाख करोड़ रुपये (13 अरब डॉलर) का कर्ज लेने पड़ रहे हैं। सरकार ने इसकी तैयारी भी कर ली है।

मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि इस कर्ज से ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती से होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो जाएगी। साथ ही जीएसटी के उच्च संग्रह से भी कुछ हद तक मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते कर्ज का बोझ शायद भारत के बॉन्ड बाजार को हिला देगा, जहां पिछले एक महीने में बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ गया है।

जमा पर घटेगा ब्याज दर और लोन हो जाएगा महंगा

सरकार सस्ती डीजल और पेट्रोल की वजह से लगभग एक लाख करोड़ रुपए के घाटे की भरपाई के लिए वैकल्पिक रास्ते चुनने जा रही है। सरकार कई अन्य सेवाओं में जीएसटी की दर बढ़ा सकती है जबकि बैंक में जमा राशि पर ब्याज दर घटा सकती है और लोन महंगा कर सकती है।

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