November 26, 2022

अवधभूमि

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बड़ी संख्या में घाटी छोड़कर निकल रहे कश्मीरी पंडित: सरकार और उसके वादों पर भरोसा नहीं

घाटी छोड़कर निकल रहे कश्मीरी पंडित

श्रीनगर। धारा 370 और 35a पकाते समय केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे श्रीनगर में आतंकवादियों की कमर टूट गई है और कश्मीरी पंडितों के अच्छे दिन आने वाले हैं लेकिन सरकार के दावे के उलट बहुत से कश्मीरी पंडित टारगेट किलिंग का शिकार हुए जिससे उनके मन में भय और दहशत व्याप्त हो गया। डर के मारे पिछले 4 महीने में हजारों कश्मीरी पंडित जो 1990 में भी बिना डरे कश्मीर घाटी में आबाद रहे उनका भी विश्वास हिल गया और सब के सब घर बार और कारोबार छोड़कर पलायन कर गए । केवल वहीं कश्मीर पंडित घाटी में थे जिनको सरकारी नौकरी मिली हुई थी । उन्होंने नौकरी और जिंदगी में जिंदगी को प्राथमिकता देते हुए घाटी छोड़ने का निश्चय किया। सरकार ने उन पर दबाव बनाने के लिए आदेश जारी कर दिया कि जो कश्मीर घाटी छोड़ेगा उसे फंड वेतन या पेंशन कुछ भी नहीं दिया जाएगा बावजूद इसके लोगों ने बड़ी संख्या में कश्मीर घाटी छोड़ दी। टारगेट किलिंग के डर से आज और अधिक कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी से निकल गए हैं. लगातार जारी पलायन में, उसी गांव में पूरन कृष्ण भट की हालिया हत्या के बाद दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के चौधरीगुंड इलाके से 10 कश्मीरी पंडित अपने परिवारों (30 से 40 लोग) समेत निकल गए हैं.।

इधर, टारगेट किलिंग के कारण कुछ महीने पहले ही कश्मीर घाटी से भागे सैकड़ों कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के लिए इस बार की दिवाली काली रही. दरअसल ये सैकड़ों कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारी कई महीनों से बिना वेतन के हैं. कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारी पिछले 160 दिनों से अधिक समय से जम्मू में धरने पर हैं.ये धरना इसलिए क्योंकि कई माह से उनका वेतन रुका हुआ है.।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की थी कि दिवाली के मद्देनजर उनका वेतन तुरंत जारी किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.इंडिया टुडे से बात करते हुए, प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि उनमें से कई को तो इस साल जून से वेतन नहीं मिल रहा है.ये कर्मचारी वेतन के साथ- साथ जम्मू में अपने ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं जबकि इन्हें कहा जा रहा है कि पहले कश्मीर आकर नौकरी ज्वाइन करें तभी सैलरी मिलेगी.

सरकार की एक गलत फैसले ने कश्मीर घाटी के पंडितों का जीवन नर्क बना दिया:

जानकारों का मानना है कि सरकार ने अपनी उपलब्धि बताने के लिए वेबसाइट पर घाटी के कश्मीरी पंडितों के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों का विवरण देते हुए घाटी में बसे हुए पंडितों का नाम और पता सब कुछ वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जिसकी वजह से आतंकवादियों को कश्मीरी पंडितों को टारगेट बनाने में आसानी हो गई। आतंकियों ने वेबसाइट खंगाल ते हुए चुन-चुन कर कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाना शुरू कर दिया जिसके बाद घाटी भर में कश्मीरी पंडितों के मन में आतंक व्याप्त हो गया और वह घाटी छोड़कर भागने लगे।