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कुर्सी कांड से उठा सियासी तूफान, मंत्री नितिन अग्रवाल की सूझबूझ से टला बड़ा विवाद: भाजपा विधायक योगेश वर्मा के अपमान पर भड़के हालात, अधिकारियों की लापरवाही आई



लखीमपुर खीरी।
प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल की समीक्षा बैठक उस समय सियासी तूफान में तब्दील होती दिखी, जब भाजपा विधायक योगेश वर्मा को सभागार में बैठने के लिए कुर्सी तक नसीब नहीं हुई। बैठक के समय में फेरबदल और मंत्री के देर से पहुंचने के बीच प्रशासनिक अव्यवस्था खुलकर सामने आ गई।
अपनी ही सरकार में विधायक को मिले इस “व्यवहार” से आहत योगेश वर्मा बैठक छोड़कर बाहर चले गए। सत्ता पक्ष के विधायक का इस तरह बाहर जाना सीधे-सीधे प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया। कुछ ही देर में मामला पार्टी अनुशासन, सम्मान और शक्ति संतुलन तक जा पहुंचा।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मंत्री नितिन अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर ही जमकर फटकार लगाई और साफ कहा कि जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज करने की कीमत भारी पड़ सकती है। मंत्री के तेवर इतने सख्त थे कि अधिकारी विधायक को मनाने बाहर जाने को मजबूर हो गए।
काफी मान-मनौव्वल के बाद योगेश वर्मा को सम्मानजनक ढंग से वापस सभागार में लाया गया और बैठने की व्यवस्था कराई गई। मंत्री के हस्तक्षेप से जहां एक बड़ा सियासी विवाद टल गया, वहीं यह संदेश भी गया कि सत्ता और संगठन में विधायक योगेश वर्मा की हैसियत को हल्के में लेना अब आसान नहीं होगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि मंत्री ने समय रहते मोर्चा न संभाला होता, तो मामला सीधे संगठन और सरकार के बीच असहज स्थिति पैदा कर सकता था। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ यह भी उजागर करती है कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर भीतरखाने किस कदर असंतोष पनप रहा है।

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