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यूपी आबकारी विभाग की मेगा प्लानिंग: 1000 नई शराब दुकानों की तैयारी, बैठक में अधिकारियों को लेकर भी बड़ी टिप्पणी:

उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिन्होंने विभागीय हलकों में हलचल तेज कर दी है। बैठक में प्रमुख सचिव आबकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बड़ी शराब दुकानों के आसपास छोटी दुकानों का नेटवर्क तेजी से विकसित किया जाए। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पूरे प्रदेश में करीब 1000 नई शराब दुकानें खोलने की योजना पर गंभीरता से काम चल रहा है।

सरकार का फोकस आबकारी राजस्व बढ़ाने पर बताया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत उन इलाकों की पहचान की जा रही है जहां शराब उपभोक्ताओं की संख्या अधिक है लेकिन दुकानों की उपलब्धता कम है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे क्षेत्रों में नए लाइसेंस और छोटी दुकानों के प्रस्ताव तेजी से तैयार किए जाएं।

बैठक में विशेष रूप से मुरादाबाद मंडल का जिक्र हुआ, जहां नई दुकानों की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया गया। विभागीय अधिकारियों से कहा गया कि उपभोक्ताओं तक दुकानों की “आसान पहुंच” सुनिश्चित की जाए। सूत्रों के अनुसार यह भी चर्चा हुई कि कई क्षेत्रों में बड़ी दुकानों पर अत्यधिक भीड़ रहती है, इसलिए उनके आसपास छोटी दुकानों का विस्तार किया जाए ताकि बिक्री और राजस्व दोनों बढ़ सकें।

इसी दौरान बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण और चर्चित टिप्पणी भी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक चर्चा के दौरान यह बात उठी कि बड़ी संख्या में सिपाही और इंस्पेक्टर एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही तैनाती चाहते हैं। इस पर आबकारी आयुक्त ने दो टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि “इसी क्षेत्र में ओवररेटिंग चल रही है, इससे बहुत कुछ साबित होता है।” विभागीय गलियारों में आयुक्त की इस टिप्पणी को बेहद गंभीर माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी उन आरोपों और चर्चाओं की तरफ इशारा करती है जिनमें पश्चिमी यूपी और एनसीआर क्षेत्रों को “कमाई वाले क्षेत्र” के रूप में देखा जाता रहा है।

आयुक्त की इस टिप्पणी के बाद विभाग के भीतर चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। कई अधिकारी इसे विभागीय व्यवस्था और पोस्टिंग सिस्टम पर बड़ा संकेत मान रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि सरकार अब संवेदनशील जिलों और हाई-रेवेन्यू क्षेत्रों में तैनाती को लेकर अधिक सख्ती बरत सकती है।

बैठक में आबकारी आयुक्त ने ट्रांसफर नीति पर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने दोहराया कि विभाग में सभी तबादले पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से ही किए जाएंगे और किसी प्रकार की सिफारिश या दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके अधिकार क्षेत्र वाले “25 नंबर” आसानी से किसी को उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। इस बयान के बाद विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने कानपुर, मुरादाबाद और संभल की राजस्व स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि आखिर निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले राजस्व संग्रह में कमी क्यों आ रही है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि प्रवर्तन कार्रवाई तेज की जाए और राजस्व वसूली में सुधार लाया जाए।

सूत्रों के मुताबिक सरकार अब जिलेवार समीक्षा कर यह तय करेगी कि किन क्षेत्रों में नई दुकानों की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसके लिए बिक्री के आंकड़े, उपभोक्ताओं की संख्या और राजस्व क्षमता का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि यदि प्रस्तावित 1000 नई दुकानें खुलती हैं तो आने वाले समय में आबकारी विभाग का राजस्व रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।

हालांकि इस पूरी योजना को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार को केवल राजस्व वृद्धि नहीं बल्कि इसके सामाजिक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं विभागीय तर्क यह है कि लाइसेंसी दुकानों का विस्तार होने से अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगेगा और सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यूपी में शराब दुकानों के इस बड़े विस्तार अभियान से सरकार को आर्थिक लाभ मिलेगा, या फिर यह फैसला सामाजिक और राजनीतिक बहस का नया केंद्र बनेगा। फिलहाल आबकारी विभाग की यह बैठक प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।

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