
प्रयागराज, 17 अप्रैल 2026।
उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग में अधिकारियों के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। � के अनुसार, आबकारी आयुक्त कार्यालय, प्रयागराज द्वारा पत्रांक—(पीडीएफ में उल्लिखित पत्रांक), दिनांक 17 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसमें सहायक आबकारी आयुक्तों एवं जिला आबकारी अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (ACR) की नई मूल्यांकन व्यवस्था लागू की गई है।
किस आधार पर लिया गया फैसला?
यह आदेश शासन के पत्र संख्या 364/f-7/2020, दिनांक 13 मार्च 2026 के अनुपालन में जारी किया गया है।
इसके साथ ही वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है।
मुख्य उद्देश्य क्या है?
नई व्यवस्था लागू करने के पीछे प्रमुख उद्देश्य हैं:
आबकारी राजस्व लक्ष्य की प्रभावी प्राप्ति
प्रवर्तन कार्यों को मजबूत बनाना
अवैध शराब पर सख्त नियंत्रण
अधिकारियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना
अब कैसे होगा अधिकारियों का मूल्यांकन?
आदेश के अनुसार, अब जिला आबकारी अधिकारी और सहायक आबकारी आयुक्तों की ACR में तीन स्तर तय किए गए हैं:
1. प्रतिवेदक अधिकारी (Reporting Officer)
2. समीक्षक अधिकारी (Reviewing Officer)
3. स्वीकर्ता अधिकारी (Accepting Authority)
इन तीनों स्तरों पर अधिकारियों के कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा।
茶 किस पद के लिए कौन करेगा मूल्यांकन?
जिला आबकारी अधिकारी / सहायक चार्ज
प्रतिवेदक: आबकारी आयुक्त
समीक्षक: जिलाधिकारी
स्वीकर्ता: प्रमुख सचिव / अपर मुख्य सचिव
सहायक आबकारी आयुक्त (विभिन्न शाखाएं)
(विधि शाखा)
प्रतिवेदक: उप आबकारी आयुक्त
समीक्षक: आबकारी आयुक्त
स्वीकर्ता: अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव
(EIB – प्रवर्तन इकाई)
प्रतिवेदक: संयुक्त आबकारी आयुक्त
समीक्षक: आबकारी आयुक्त
स्वीकर्ता: अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव
(टास्क फोर्स)
प्रतिवेदक: संयुक्त आबकारी आयुक्त
समीक्षक: आबकारी आयुक्त
स्वीकर्ता: अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव
(कार्मिक एवं अधिष्ठान)
प्रतिवेदक: उप आबकारी आयुक्त
समीक्षक: आबकारी आयुक्त
स्वीकर्ता: अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव
(लाइसेंसिंग)
प्रतिवेदक: उप आबकारी आयुक्त
समीक्षक: आबकारी आयुक्त
स्वीकर्ता: अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव
⚠️ क्या बदला है इस आदेश में?
पहले मूल्यांकन प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी थी
अब तीन-स्तरीय प्रणाली लागू कर दी गई है
हर स्तर पर जिम्मेदारी तय कर दी गई है
शासन स्तर से अंतिम स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई है
किन अधिकारियों पर लागू होगा आदेश?
यह आदेश लागू होगा:
सभी जिला आबकारी अधिकारियों पर
सभी सहायक आबकारी आयुक्तों पर
मुख्यालय, प्रवर्तन, टास्क फोर्स और अन्य इकाइयों के अधिकारियों पर
अन्य निर्देश
आदेश की प्रतिलिपि निम्न अधिकारियों को भेजी गई है:
सभी संयुक्त आबकारी आयुक्त
सभी उप आबकारी आयुक्त
संबंधित जोन और मुख्यालय अधिकारी
⚖️ आदेश के सकारात्मक पहलू (Positive Aspects)
✅ पारदर्शिता बढ़ेगी: तीन-स्तरीय मूल्यांकन से एकतरफा निर्णय की संभावना कम होगी
✅ जवाबदेही तय होगी: हर स्तर पर अधिकारी की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी
✅ राजस्व में वृद्धि की संभावना: लक्ष्य आधारित मूल्यांकन से वसूली बेहतर हो सकती है
✅ अवैध गतिविधियों पर लगाम: प्रवर्तन को प्राथमिकता मिलने से अवैध शराब पर नियंत्रण मजबूत होगा
✅ प्रदर्शन आधारित सिस्टम: अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को पहचान मिलेगी
⚠️ आदेश के नकारात्मक पहलू (Negative Aspects)
❗ अत्यधिक दबाव: राजस्व लक्ष्य के कारण अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है
❗ ग्राउंड रियलिटी की अनदेखी: हर जिले की स्थिति अलग होती है, लेकिन मूल्यांकन एक जैसा रहेगा
❗ ब्यूरोक्रेटिक देरी: तीन-स्तरीय प्रक्रिया से ACR पास होने में समय अधिक लग सकता है
❗ ऊपरी स्तर पर निर्भरता: अंतिम निर्णय उच्च अधिकारियों पर केंद्रित होने से पक्षपात की आशंका बनी रह सकती है
❗ प्रवर्तन में कठोरता का जोखिम: लक्ष्य पूरा करने के दबाव में आम जनता या छोटे कारोबारियों पर सख्ती बढ़ सकती है
यह आदेश लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सूत्रों और विभागीय चर्चाओं के अनुसार, पिछले कुछ समय से आबकारी विभाग में:
ACR मूल्यांकन को लेकर असमानता और विवाद की स्थिति बन रही थी
कुछ मामलों में राजस्व लक्ष्य और वास्तविक कार्य के बीच अंतर देखने को मिला
प्रवर्तन कार्यों में कमजोरी और जवाबदेही की कमी की शिकायतें थीं
अलग-अलग जिलों में मूल्यांकन के अलग-अलग मानक अपनाए जा रहे थे
इन्हीं कारणों से एक एकीकृत और सख्त मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की जरूरत महसूस की गई।
❓ कमिश्नर के अधिकारों पर उठे सवाल
इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:
आबकारी आयुक्त (कमिश्नर), जो विभाग का मुखिया होता है, उसके अधिकार सीमित क्यों किए गए?
पहले कई मामलों में अंतिम प्रभाव कमिश्नर स्तर पर ही रहता था
अब अंतिम स्वीकृति प्रमुख सचिव / अपर मुख्य सचिव के पास केंद्रित कर दी गई है
樂 क्या चल रहा है अंदरखाने?
विभागीय हलकों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं कि:
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक सुधार है?
या फिर ऊपरी स्तर पर नियंत्रण बढ़ाने की रणनीति?
कुछ लोग इसे कमिश्नर और शासन स्तर (प्रमुख सचिव) के बीच संभावित मतभेदों से भी जोड़कर देख रहे हैं
⚠️ हालांकि, इस तरह के किसी भी शीत युद्ध (Cold War) या टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह सिर्फ चर्चाओं और अटकलों के रूप में सामने आ रहा है।
易 निष्कर्ष
इस नई व्यवस्था से एक ओर जहां आबकारी विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर अधिकारों के केंद्रीकरण और प्रशासनिक दबाव जैसे सवाल भी उठ रहे हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आदेश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और विभाग के अंदर उठ रहे सवालों का क्या जवाब सामने आता है।




More Stories
यूपी में GST का बड़ा एक्शन: मुजफ्फरनगर के होटल में 54 लाख की टैक्स चोरी पकड़ी गई:
प्रतापगढ़ में कर्मचारियों की बैठक, समस्याओं पर हुई अहम चर्चा
प्रतापगढ़ में बैंक डूबी, हजारों लोगों के कई 100 करोड रुपए फ्रीज :