अवधभूमि

हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार

आबकारी विभाग में फर्जी कार्रवाई पर चला मुख्य सचिव का डंडा:


लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव द्वारा जारी सख्त सर्कुलर ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब हाल ही में आबकारी विभाग द्वारा गन्ना विभाग के अधिकारियों के माध्यम से फुटकर शराब दुकानों पर ओवररेटिंग और मिलावट की जांच कराए जाने का मामला सामने आया, वह भी बिना किसी लिखित आदेश के।
 पूरा मामला क्या है?
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में:
गन्ना विभाग के अधिकारियों को अचानक शराब की दुकानों पर भेजा गया
वहां ओवररेटिंग (MRP से ज्यादा कीमत) और मिलावट की जांच कराई गई
कई दुकानदारों पर दबाव बनाया गया, जबकि
इस कार्रवाई के लिए आबकारी विभाग की ओर से कोई अधिकृत या लिखित आदेश जारी नहीं था
यही मामला धीरे-धीरे विवाद का रूप लेता गया और शिकायतें सीधे शासन स्तर तक पहुंच गईं।
 मुख्य सचिव को क्यों करना पड़ा हस्तक्षेप?
लगातार मिल रही शिकायतों में यह आरोप लगाया गया कि:
अन्य विभागों के जरिए आबकारी मामलों में हस्तक्षेप कराया जा रहा था
कुछ मामलों में जांच के नाम पर दबाव और ब्लैकमेलिंग की स्थिति बन रही थी
आबकारी नीति 2026-27 के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा था
इन गंभीर आरोपों के बाद मुख्य सचिव ने तत्काल संज्ञान लिया और सख्त आदेश जारी किया।
⚖️ सर्कुलर में क्या-क्या निर्देश?

 आधिकारिक पत्र का विवरण (एक नजर में):
उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव कार्यालय, लोक भवन, लखनऊ द्वारा यह पत्र दिनांक 23 मार्च 2026 को पत्रांक 131/…/2026 के तहत जारी किया गया। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि आबकारी अनुज्ञापन (लाइसेंस) से संबंधित मामलों में केवल आबकारी विभाग के अधिकृत अधिकारी ही जांच व छापेमारी करेंगे। किसी भी अन्य विभाग द्वारा बिना वैध अधिकार या लिखित आदेश के की गई कार्रवाई को नियम विरुद्ध और अवैध माना जाएगा। साथ ही, फुटकर शराब/भांग दुकानों पर ओवररेटिंग या मिलावट की जांच भी निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि आबकारी नीति 2026-27 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और यदि कोई अधिकारी या विभाग इन निर्देशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की


मुख्य सचिव के आदेश में साफ तौर पर कहा गया है:
केवल अधिकृत आबकारी अधिकारी ही जांच और छापेमारी करेंगे
बिना वैध अधिकार या लिखित आदेश के की गई कार्रवाई अवैध मानी जाएगी
किसी अन्य विभाग को आबकारी मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं
नियम विरुद्ध कार्रवाई करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी
 आबकारी विभाग में अंदरखाने हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आबकारी विभाग में:
अधिकारियों ने राहत की सांस ली है
अंदरखाने चर्चा है कि:
“लंबे समय से बाहरी दबाव और फर्जी कार्रवाई के जरिए अधिकारियों को टारगेट किया जा रहा था”
हालांकि, कुछ अधिकारी इस मामले पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
❗ सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
इतना बड़ा आदेश आने के बाद भी:  आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या फॉलो-अप आदेश क्यों जारी नहीं हुआ?
क्या विभाग:
जिम्मेदारी तय होने का इंतजार कर रहा है?
या फिर इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है?
 जांच के घेरे में कई पहलू
अब इस पूरे मामले में कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं:
बिना लिखित आदेश के कार्रवाई कराने का फैसला किसने लिया?
गन्ना विभाग के अधिकारियों को इस काम में लगाने के पीछे किसका निर्देश था?
क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या कोई संगठित दबाव तंत्र?
क्या संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
裡 Avadh Bhumi News का बड़ा खुलासा
सूत्रों का दावा है कि:  कुछ मामलों में अन्य विभागों के जरिए छापेमारी कराकर “सेटिंग” और दबाव बनाने का खेल चल रहा था
 दुकानदारों और अधिकारियों दोनों पर डर का माहौल बनाया जा रहा था
 निष्कर्ष
मुख्य सचिव का यह आदेश सिर्फ एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि
 पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की कोशिश माना जा रहा है।
लेकिन असली परीक्षा अब होगी—
क्या इस आदेश के बाद वाकई फर्जीवाड़ा रुकेगा, या फिर सिस्टम में बैठे लोग नए तरीके खोज लेंगे?
✍️ Avadh Bhumi News
(सवाल जारी है… जवाब का इंतजार है)

About Author