
आबकारी मुख्यालय की जमीन पर भूमाफिया का कब्जा, शीर्ष अधिकारियों की गैरमौजूदगी बनी सबसे बड़ी वजह
आबकारी विभाग के मुख्यालय की बेशकीमती जमीन इन दिनों भूमाफियाओं के निशाने पर है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि मुख्यालय परिसर स्थित गोदाम की दीवार तक गिरा दी गई, लेकिन विभाग अब तक न तो सख्त कदम उठा पाया है और न ही एफआईआर दर्ज कर सका है।
सूत्रों के मुताबिक, आबकारी मुख्यालय से कमिश्नर समेत लगभग सभी शीर्ष अधिकारी लंबे समय से गायब बताए जा रहे हैं। विभाग में कंट्रोल और कमांड की स्थिति पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी है, जिसका सीधा फायदा भूमाफिया उठा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी में भूमाफिया न सिर्फ जमीन पर कब्जे की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि विभाग से ही जमीन से जुड़े कागजात मांगकर अपने इरादे साफ कर चुके हैं।
लखनऊ शिफ्टिंग की खबर से बढ़े हौसले
बताया जा रहा है कि जैसे ही भूमाफियाओं को यह जानकारी मिली कि आबकारी विभाग “कंट्रोल एंड कमांड सेंटर” के नाम पर लखनऊ शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा है, तभी से उनके हौसले बुलंद हो गए। भूमाफियाओं को लगने लगा कि मुख्यालय खाली होते ही इस जमीन पर दावा करना आसान हो जाएगा।
विभागीय मिलीभगत की चर्चा
मामले को लेकर विभाग के अंदर ही मिलीभगत की चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहे हैं कि बिना अंदरूनी सहयोग के गोदाम की दीवार कैसे गिराई गई और सरकारी जमीन से जुड़े दस्तावेजों की मांग किस आधार पर की जा रही है।
एफआईआर तक नहीं, करोड़ों की जमीन खतरे में
हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये मूल्य की इस जमीन पर खुलेआम कब्जे की कोशिश के बावजूद विभाग अब तक एफआईआर तक दर्ज नहीं करा सका है। यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और विभाग की मंशा पर भी संदेह पैदा कर रही है।
बड़े सवाल
मुख्यालय से कमिश्नर समेत शीर्ष अधिकारी आखिर क्यों गायब हैं?
गोदाम की दीवार गिराने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या लखनऊ शिफ्टिंग की आड़ में जमीन हड़पने का रास्ता साफ किया जा रहा है?
विभाग के भीतर कौन लोग भूमाफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं?
फिलहाल आबकारी विभाग की यह कीमती जमीन प्रशासनिक लापरवाही और कथित मिलीभगत के चलते गंभीर खतरे में है। यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला एक बड़े सरकारी जमीन घोटाले का रूप ले सकता है।




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