
प्रतापगढ़ (लालगंज) — ग्राम सभा की बेशकीमती तालाब की जमीन को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराने में ADGC (राजस्व) अरविंद शुक्ला की प्रभावी पैरवी निर्णायक साबित हुई। उपजिलाधिकारी लालगंज द्वारा पारित आदेश में साफ तौर पर अवैध रूप से दर्ज निजी नामों को खारिज करते हुए जमीन को पुनः तालाब (ग्रामसभा) के खाते में दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
⚖️ पूरा मामला क्या था
ग्राम नागापुर, तहसील लालगंज की गाटा संख्या 336 (पुरानी 291) की जमीन, जो मूल रूप से तालाब थी, राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर निजी व्यक्तियों—मुनीर अहमद आदि—के नाम दर्ज कर दी गई थी।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि:
जमीन का मूल स्वरूप तालाब (सार्वजनिक उपयोग) था
पुराने बंदोबस्त (1331 फसली) में भी यह तालाब दर्ज थी
बाद में बिना वैध आधार के निजी नाम चढ़ा दिए गए
खतौनी में ओवरराइटिंग और कटिंग पाई गई, जिससे रिकॉर्ड संदिग्ध हुआ
️ कोर्ट की सुनवाई और मोड़
मामले में पहले 2007 में आदेश हुआ, फिर अपील के बाद 2008 में दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए गए। विस्तृत बहस और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने पाया कि निजी पक्ष अपने दावे को साबित नहीं कर सका।
⚖️ ADGC (रेवेन्यू) अरविंद शुक्ला की अहम भूमिका
सरकार की ओर से पैरवी करते हुए ADGC रेवेन्यू अरविंद शुक्ला ने अदालत में ठोस दलीलें पेश कीं—
तालाब की भूमि को निजी नाम पर दर्ज करना कानूनन गलत है
राजस्व रिकॉर्ड में की गई एंट्री संदिग्ध और अवैध है
कोई वैध साक्ष्य नहीं है जिससे निजी स्वामित्व साबित हो
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले “हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी (2001)” का हवाला देते हुए यह स्थापित किया कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन को उसके मूल स्वरूप में लौटाना अनिवार्य है।
⚖️ अदालत का सख्त फैसला
उपजिलाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा—
गाटा संख्या 336 पर दर्ज सभी निजी खातेदारों के नाम खारिज किए जाएं
भूमि को पूर्ववत तालाब (ग्रामसभा) के रूप में दर्ज किया जाए
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट को आदेश का हिस्सा माना जाए
भू-माफियाओं को बड़ा झटका
यह फैसला उन लोगों के लिए करारा संदेश है जो सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर लेते हैं। वर्षों से चली आ रही इस लड़ाई में आखिरकार प्रशासन और कानून की जीत हुई।
茶 निष्कर्ष
ADGC अरविंद शुक्ला की मजबूत पैरवी + अदालत का सख्त रुख = भू-माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई
यह मामला दिखाता है कि अगर सरकारी पक्ष मजबूती से पैरवी करे, तो ग्रामसभा की जमीन को बचाया जा सकता है और अवैध कब्जों को हटाया जा सकता है।




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