
लखनऊ। एक बार फिर दिल्ली और लखनऊ में शीत युद्ध की खबरें आने लगी हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार का है जो कल रिटायर हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से उनके सेवा विस्तार के प्रपोजल को केंद्र सरकार ने ठुकरा दिया इसके बाद उन्होंने इस पद के लिए किसी दूसरे नाम को नहीं भेजा तथा अपने बेहद नजदीकी राजीव कृष्ण को कार्यकारी पुलिस महानिदेशक नियुक्त कर दिया। सूत्रों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने नए डीजीपी के लिए कोई पैनल केंद्र सरकार को इसलिए नहीं भेजा क्योंकि केंद्र सरकार उनके किसी भी करीबी व्यक्ति को इस पद के लिए नकार सकती थी। भविष्य में रिटायर होने वाले मुख्य सचिव मनोज कुमार को लेकर भी संदेह गहरा हो गया है। माना जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ की प्रबल इच्छा के बावजूद मनोज कुमार सिंह को भी सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। इसके संकेत इस समय मिल गए जब नोएडा के एक भूमि घोटाले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से प्रदेश सरकार से जवाब तलब कर लिया गया। यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि मुख्यमंत्री कार्यालय को यहां राजभवन से भी चुनौती मिलनी शुरू हो गई है बहुत सी पत्रावली मुख्यमंत्री कार्यालय की राजभवन में लंबित है या कोई क्वेरी लगाकर वापस भेज दी गई।
प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी कैबिनेट में भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्यमंत्री से दूरी बनाकर चल रहे हैं जबकि यही हाल डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का भी है। सहयोगी दलों की बात करें तो ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद से भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मामला ठीक नहीं चल रहा है।
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। कहां जा रहा है कि एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुलाई महीने में सियासी जलजला आ सकता है इस बीच में कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सक्रिय हो गया है और उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के चयन को लेकर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अब तक किसी प्रकार की कोई सलाह नहीं ली जा रही है। बताया जा रहा है कि आगामी 9 जून को उत्तर प्रदेश सहित बाकी सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष घोषित हो सकते हैं जबकि 14 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए चुनौती केवल भाजपा में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी खड़ी हो गई है कहां जा रहा है कि संघ ने योगी आदित्यनाथ से दूरी बना रखी है। और 2027 के लिए किसी नए चेहरे पर मंथन शुरू कर दिया है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पिछड़े वर्ग से ही किसी नए चेहरे को 2027 के चुनाव के लिए सामने लाने की तैयारी है।




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