
आबकारी विभाग की निरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल, स्वतंत्र जांच की उठी मांग
प्रथम निरीक्षण के रिकॉर्ड और पक्के मुआयने में विरोधाभास से बढ़ी बेचैनी
उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग में डिस्टलरी और चीनी मिलों के निरीक्षण (मुआयना) की प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ इकाइयों में प्रथम निरीक्षण में दर्ज आपत्तियाँ बाद के पक्के निरीक्षण में स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं हुईं, जिससे पूरी निरीक्षण प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
यह मामला मुख्य रूप से मेरठ और लखनऊ जोन से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में चीनी मिलें और डिस्टलरी संचालित हैं।
प्रथम निरीक्षण में क्या दर्ज होना अनिवार्य है?
जानकारों के अनुसार, आबकारी विभाग की नियमावली और SOP के तहत प्रथम निरीक्षण (Preliminary Inspection) के दौरान—
निरीक्षण रजिस्टर में
तिथि, समय
निरीक्षण अधिकारी का नाम व पद
निरीक्षण का उद्देश्य
पाई गई कमियां / आपत्तियां
मौके पर दिए गए निर्देश
का लिखित रिकॉर्ड अनिवार्य होता है।
यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो
निरीक्षण टिप्पणी (Inspection Note/Memo) तैयार की जाती है,
जो आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा होती है।
स्टॉक मिलान के दौरान
भौतिक स्टॉक
स्टॉक रजिस्टर
ई-इंडेंट
पास निर्गमन
उत्पादन व उपभोग रिकॉर्ड
में अंतर होने पर उसे स्पष्ट रूप से दर्ज करना आवश्यक है।
पक्के निरीक्षण में आपत्तियाँ कैसे हटाई जा सकती हैं?
विभागीय SOP के अनुसार—
प्रथम निरीक्षण में दर्ज किसी भी कमी को पक्के निरीक्षण में तब तक नहीं हटाया जा सकता,
जब तक कि—
उसका लिखित निस्तारण
या संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट
रिकॉर्ड पर उपलब्ध न हो।
सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में
पहले दर्ज आपत्तियों के निस्तारण का स्पष्ट उल्लेख
पक्के निरीक्षण की रिपोर्ट में दिखाई नहीं देता।
नियमों के अनुपालन पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, जिन बिंदुओं पर सवाल उठ रहे हैं, उनमें शामिल हैं—
मोलासेस के भंडारण, निर्गमन और उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड
डिजिटल स्टॉक और भौतिक स्टॉक का मिलान
निरीक्षण के दौरान फोटो / डिजिटल साक्ष्य का संलग्न न होना
संभावित राजस्व प्रभाव की उच्चाधिकारियों को समय पर रिपोर्टिंग
जानकारों का मानना है कि इन बिंदुओं पर रिकॉर्ड का स्पष्ट और क्रमबद्ध होना अनिवार्य है।
स्वतंत्र जांच हुई तो कई डिस्टलरी बेनकाब होने का दावा
सूत्रों का दावा है कि यदि—
प्रथम और पक्के निरीक्षण की रिपोर्ट
निरीक्षण रजिस्टर
स्टॉक व उत्पादन रिकॉर्ड
ई-इंडेंट और पास निर्गमन विवरण
का स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया जाए,
तो कई डिस्टलरियों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक,
“मौजूदा सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि निरीक्षण प्रणाली की पारदर्शिता पर हैं।
यदि जांच वर्तमान व्यवस्था से अलग कराई जाए, तो कई विसंगतियाँ स्वतः उजागर हो सकती हैं।”
शासन और मंत्री के लिए अहम विषय
यह मामला अब—
आबकारी राजस्व की सुरक्षा
निरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता
और प्रशासनिक जवाबदेही
से जुड़ता दिख रहा है।
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि
यदि स्वतंत्र जांच या थर्ड-पार्टी ऑडिट कराया जाता है,
तो सभी संदेह स्वतः दूर हो सकते हैं और व्यवस्था पर विश्वास भी कायम रहेगा।
अवध भूमि न्यूज़ का स्पष्ट पक्ष
अवध भूमि न्यूज़ यह स्पष्ट करता है कि—
यह रिपोर्ट सूत्रों और विभागीय प्रक्रियाओं की जानकारी के आधार पर तैयार की गई है
किसी भी अधिकारी, इकाई या संस्था को दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं
यदि कोई पक्ष अपना पक्ष रखना चाहे, तो उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा
निष्कर्ष
यह पूरा मामला किसी व्यक्ति विशेष से अधिक
निरीक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता
नियमों के समान अनुपालन
और प्रशासनिक जवाबदेही
से जुड़ा है, जिस पर समय रहते ध्यान देना विभाग और शासन—दोनों के हित में है।
अभी हाल ही में धामपुर चीनी मिल डिस्टलरी में भी इनकम टैक्स का छापा पड़ा था लेकिन विभाग द्वारा इस पर खामोशी अख्तियार कर ली गई है। प्रमुख सचिव के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चीनी मिल और डिस्टलरी का मुआइना चल रहा है लेकिन इस मुआयने में टेक्निकल टीम शामिल क्यों नहीं है। विभाग के क्षेत्रीय लैब टेक्नोलॉजिस्ट डिस्टलरी का मुआइना करने नियमित रूप से जा रहे हैं इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। एक विवादित जॉइंट एक्साइज कमिश्नर जो मेरठ और लखनऊ क्षेत्र देख रहे हैं उनके मुआयने को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों क्षेत्र लखनऊ और मेरठ में बड़े पैमाने पर डिस्टलरी है ऐसे में लगभग 100 से अधिक डिस्टलरी और 50 से ज्यादा चीनी मिल का जमीनी मुआयना निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से एक व्यक्ति द्वारा किया जाना तार्किक और व्यावहारिक रूप से सही नहीं लग रहा है।




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