
कायमगंज का तंबाकू कारोबार इन दिनों सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और संदिग्ध सप्लाई नेटवर्क की वजह से जांच एजेंसियों के रडार पर है। लखनऊ में पकड़ी गई “भगत छाप” तंबाकू की खेप ने जिस नेटवर्क का खुलासा किया, उसने फर्रुखाबाद के इस छोटे से कस्बे को राज्य स्तरीय जांच के केंद्र में ला खड़ा किया है। शुरुआती तौर पर यह मामला सिर्फ बिना बिल माल पकड़े जाने का लग रहा था, लेकिन अब जांच कई परतों में खुलती दिखाई दे रही है।
कैसे खुला पूरा मामला
सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ में पकड़े गए ट्रक में ऊपर डिटर्जेंट पाउडर रखा गया था, जबकि नीचे बड़ी मात्रा में तंबाकू छिपाकर ले जाई जा रही थी। जांच टीम को जब माल के दस्तावेज संदिग्ध लगे तो ट्रक को रोका गया। पड़ताल में सामने आया कि जिस तंबाकू ब्रांड का माल पकड़ा गया, उसका संबंध कायमगंज के कारोबारी नेटवर्क से जुड़ रहा है। यही इनपुट आगे की कार्रवाई का आधार बना।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक ट्रक का मामला नहीं है, बल्कि टैक्स बचाने के लिए अपनाए जाने वाले उस पुराने नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जिसमें माल कुछ और दिखाकर भेजा जाता है और वास्तविक माल छिपाकर परिवहन किया जाता है।
कायमगंज क्यों बना जांच का केंद्र
फर्रुखाबाद का कायमगंज वर्षों से तंबाकू उद्योग का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां छोटे-बड़े सैकड़ों कारोबारी हैं जो विभिन्न ब्रांड नामों से तंबाकू तैयार कर प्रदेश और दूसरे राज्यों में सप्लाई करते हैं। स्थानीय स्तर पर यह कारोबार हजारों लोगों को रोजगार देता है, लेकिन विभागीय सूत्रों का दावा है कि इसी उद्योग में सबसे ज्यादा “कैश ट्रेड”, बिना बिल बिक्री और फर्जी ई-वे बिल की शिकायतें मिलती रही हैं।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कई कारोबारी उत्पादन क्षमता कम दिखाते हैं, जबकि वास्तविक सप्लाई कहीं अधिक होती है। पैकेजिंग सामग्री, कच्चे माल की खरीद और बाजार में उपलब्ध उत्पादों के आंकड़ों में भी अंतर मिलने की बात कही जा रही है।
छापेमारी में क्या मिला
एसआईबी और जीएसटी टीमों ने ट्रांसपोर्ट चौराहा, जौरा रोड और आसपास के क्षेत्रों में कई प्रतिष्ठानों के दस्तावेज खंगाले। सूत्र बताते हैं कि कुछ जगहों पर स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक माल में अंतर की जांच की जा रही है। हालांकि शुरुआती कार्रवाई में कई कारोबारियों ने अपने रिकॉर्ड सही होने का दावा किया है, लेकिन विभाग अब बैंकिंग लेनदेन, ई-वे बिल और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की भी पड़ताल कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों की नजर सिर्फ एक फर्म पर नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई चैन नेटवर्क पर है — जिसमें निर्माता, ट्रांसपोर्टर, थोक व्यापारी और दूसरे राज्यों तक माल पहुंचाने वाले एजेंट शामिल हैं।
“ब्रांड का दुरुपयोग” या संगठित नेटवर्क?
जिन फर्मों के नाम सामने आए हैं, उनका कहना है कि पकड़े गए माल से उनका कोई लेना-देना नहीं है और संभव है कि किसी ने उनके ब्रांड और पते का गलत इस्तेमाल किया हो। लेकिन विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि अगर ब्रांड नाम, पैकेजिंग और सप्लाई पैटर्न लगातार मेल खा रहे हैं तो सिर्फ “दुरुपयोग” का दावा पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
यही वजह है कि अब जांच केवल स्टॉक तक सीमित नहीं रह गई है। विभाग पैकेजिंग प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट बुकिंग और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड तक की जानकारी जुटाने की तैयारी में है।
टैक्स चोरी का संभावित तरीका
जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि तंबाकू कारोबार में टैक्स चोरी के लिए आम तौर पर कुछ तरीके अपनाए जाते हैं:
- माल का मूल्य कम दिखाना
- बिना बिल नकद बिक्री
- फर्जी फर्मों के जरिए ई-वे बिल बनाना
- एक उत्पाद दिखाकर दूसरा माल भेजना
- छोटे कारोबारियों के नाम पर बड़े स्तर की सप्लाई करना
लखनऊ में पकड़े गए ट्रक में डिटर्जेंट के नीचे तंबाकू छिपाकर ले जाने की बात सामने आने के बाद विभाग को शक है कि इसी तरह के कई नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं।
कारोबारियों में डर, बाजार पर असर
लगातार छापेमारी के बाद कायमगंज के तंबाकू बाजार में दहशत का माहौल है। कई गोदामों में माल की लोडिंग धीमी हो गई है। कुछ कारोबारी पुराने बिल और स्टॉक रिकॉर्ड अपडेट करने में जुटे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष रही तो वास्तविक कारोबारी परेशान होंगे, लेकिन अगर सिर्फ चुनिंदा कार्रवाई हुई तो पूरा उद्योग संकट में आ सकता है।
आगे क्या हो सकता है
सूत्रों का कहना है कि विभाग जल्द ही कुछ और प्रतिष्ठानों को नोटिस भेज सकता है। जांच का दायरा फर्रुखाबाद से बाहर कन्नौज, कानपुर और लखनऊ तक बढ़ने की संभावना है। अगर इलेक्ट्रॉनिक डेटा और ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड में बड़े अंतर मिले तो करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का मामला खुल सकता है।
फिलहाल कायमगंज का तंबाकू उद्योग सिर्फ व्यापारिक गतिविधि नहीं, बल्कि राज्य कर विभाग की बड़ी जांच का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े टैक्स चोरी नेटवर्क में से एक का खुलासा भी कर सकती है।




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