
लखनऊ।चीनी मिल फेडरेशन की चीनी मिलों में मोलासेस को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल आरोप नहीं रह गए हैं। साल 2024 में किसान सहकारी संघ की एक चीनी मिल से मोलासेस चोरी के स्पष्ट पैटर्न को लेकर तत्कालीन ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर, मेरठ ने एक विस्तृत 5 पेज की आख्या आबकारी आयुक्त कार्यालय को भेजी थी।
इस आख्या में मोलासेस चोरी, स्टॉक में हेराफेरी और गुणवत्ता से छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
आख्या में क्या बताया गया था?
सूत्रों के मुताबिक ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर की रिपोर्ट में—
मोलासेस की अवैध निकासी का पैटर्न
कागजी स्टॉक और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर
चोरी के बाद वजन पूरा दिखाने के लिए शीरे में पानी मिलाने की आशंका
टीआरएस के असामान्य रूप से 37 से नीचे गिरने के संकेत
जैसे बिंदुओं का विस्तार से उल्लेख किया गया था।
सबसे गंभीर सवाल: रिपोर्ट के बाद क्या हुआ?
❓ जब 5 पेज की विस्तृत आख्या आबकारी आयुक्त कार्यालय को भेजी गई, तो उस पर
कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
किसी उच्च स्तरीय जांच या विशेष ऑडिट का आदेश क्यों नहीं दिया गया?
क्या रिपोर्ट को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
आबकारी आयुक्त स्तर की लापरवाही और गहरी
विशेषज्ञों का कहना है कि—
इतनी गंभीर रिपोर्ट आयुक्त कार्यालय तक पहुँचना और
उसके बाद भी कोई निर्णायक कदम न उठाया जाना
यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही या संरक्षण की ओर इशारा करता है।
एक मिल नहीं, पूरा पैटर्न
अब यह भी सवाल उठ रहा है कि—
जिस चीनी मिल में यह पैटर्न पकड़ा गया
वही तरीका क्या अन्य फेडरेशन मिलों में भी अपनाया गया?
यदि ऐसा है, तो मामला एकल चोरी नहीं बल्कि संगठित घोटाला बन जाता है।
इथेनॉल नीति और सरकारी राजस्व पर असर
मोलासेस की गुणवत्ता गिरने से—
इथेनॉल रिकवरी प्रभावित
फेडरेशन की चीनी मिलों का शीरा अनबिकाऊ
सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान
की आशंका जताई जा रही है।
अब जांच में क्या शामिल होना चाहिए?
2024 की 5 पेज की आख्या को आधार दस्तावेज बनाया जाए
उस पर आयुक्त कार्यालय में हुई नोटिंग और निर्णयों की जांच
रिपोर्ट के बाद कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
निष्कर्ष
जब एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भेजी गई विस्तृत आख्या भी कार्रवाई नहीं करा सकी, तो सवाल साफ है—
👉 क्या सिस्टम ने घोटाले को जानबूझकर नजरअंदाज किया?
यदि आज भी निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच हुई, तो यह मामला
मोलासेस चोरी से आगे बढ़कर प्रशासनिक संरक्षण के बड़े घोटाले में बदल सकता है।




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