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झांसी: फर्जी फर्म के जरिए करोड़ों का GST घोटाला, 4.5 करोड़ का अवैध लाभ लेने वाला आरोपी गिरफ्तार — स्थानीय सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल:


झांसी जनपद में जीएसटी चोरी का एक बड़ा और सुनियोजित मामला उजागर हुआ है, जिसने न केवल कर प्रणाली बल्कि स्थानीय प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली निवासी नीरज रंजन गुप्ता को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले को अंजाम दे रहा था।
ऐसे चलता था पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के कागजों में कंपनियां खड़ी कर दीं। इन फर्जी फर्मों के नाम पर—
नकली बिल और इनवॉइस तैयार किए जाते थे
फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर जीएसटी रिटर्न फाइल किया जाता था
इसके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास कराया जाता था
इस पूरे नेटवर्क के जरिए आरोपी ने करीब 4.5 करोड़ रुपये का अवैध टैक्स लाभ हासिल किया, जबकि कागजों में लगभग 24 करोड़ रुपये का काल्पनिक लेन-देन दिखाया गया।
कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फर्मों के रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
नकली पते
फर्जी पहचान पत्र
कागजी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते
इन सबके जरिए सिस्टम को धोखा देकर घोटाले को अंजाम दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई
थाना कोतवाली पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या यह गिरोह अन्य जिलों या राज्यों में भी सक्रिय है।
स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है—
फर्जी फर्मों का पंजीकरण बिना सख्त सत्यापन के कैसे हो गया?
करोड़ों के लेन-देन के बावजूद सिस्टम में अलर्ट क्यों नहीं आया?
क्या समय-समय पर जांच और फील्ड वेरिफिकेशन किया गया था?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर या तो गंभीर लापरवाही होती है या फिर अंदरूनी मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता।
संगठित गिरोह की आशंका
प्रारंभिक जांच के आधार पर यह भी संकेत मिले हैं कि यह कोई अकेले व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों में फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी सिस्टम का दुरुपयोग करता है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस और जीएसटी विभाग दोनों स्तर पर जांच जारी है। विभागीय जांच के बाद कुछ अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
फिलहाल यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

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