
IESCMS में QR व्यवस्था: पारदर्शिता या नया नियंत्रण तंत्र?**
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में हाल ही में धामपुर चीनी मिल–डिस्टिलरी पर पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे के बाद अब आबकारी विभाग ने स्पिरिट और शीरा के परिवहन को लेकर नई और सख्त व्यवस्था लागू कर दी है। IESCMS पोर्टल के माध्यम से जारी होने वाले परिवहन पासों के साथ अब अलग से A4 साइज में बड़े QR कोड को वाहन की विंडशील्ड पर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकारी तर्क भले ही इसे “डिजिटल पारदर्शिता” और “तेज सत्यापन” की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हों, लेकिन विभागीय गलियारों और उद्योग से जुड़े लोगों में इसे इनकम टैक्स छापे के बाद पैदा हुई घबराहट का नतीजा माना जा रहा है।
क्या था धामपुर चीनी मिल प्रकरण?
धामपुर चीनी मिल समूह की एक इकाई/डिस्टिलरी पर हाल ही में इनकम टैक्स विभाग ने बड़ी कार्रवाई की थी।
सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में:
- शीरा (Molasses) के उत्पादन और उपयोग
- ENA/स्पिरिट के ट्रांसपोर्ट
- पास बनाम वास्तविक मूवमेंट
- और बही-खातों व फिजिकल स्टॉक के अंतर
जैसे बिंदुओं पर गहन जांच हुई।
यद्यपि यह कार्रवाई ED की नहीं बल्कि इनकम टैक्स विभाग की थी, लेकिन इससे यह संकेत साफ हुआ कि स्पिरिट और शीरा के परिवहन तंत्र में खामियां मौजूद हैं।
इसके बाद क्यों आई नई QR व्यवस्था?
धामपुर जैसे बड़े समूह पर हुई IT कार्रवाई के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि:
जब ट्रांसपोर्ट पास पहले से QR कोड युक्त थे,
तो फिर अलग A4 शीट पर बड़े QR कोड की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आबकारी आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब:
- PD-25 (स्पिरिट)
- MF-4 (शीरा)
पासों के साथ एक अतिरिक्त बड़े QR कोड को वाहन की फ्रंट विंडशील्ड के अंदर चस्पा करना होगा, जिसे चेकिंग अधिकारी दूर से स्कैन कर सकेंगे।
सरकारी तर्क: सिस्टम मजबूत करने की दलील
विभाग का दावा है कि इस नई व्यवस्था से:
- फर्जी या डुप्लीकेट पास पर रोक लगेगी
- रूट डायवर्जन और एक पास के कई बार उपयोग पर नियंत्रण होगा
- फील्ड चेकिंग में समय बचेगा
- ट्रांसपोर्ट का रियल-टाइम सत्यापन संभव होगा
कागज पर यह व्यवस्था टेक्नोलॉजी आधारित सुधार के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।
लेकिन असली चिंता कहाँ है?
उद्योग और फील्ड से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि:
- QR कोड पहले से पास पर मौजूद था
- मोबाइल से स्कैनिंग पहले भी संभव थी
- फिर अतिरिक्त कागज की बाध्यता क्यों?
आलोचकों का कहना है कि यह आदेश:
- फील्ड स्तर पर अधिक विवेकाधीन शक्ति देता है
- छोटी तकनीकी चूक को “नियम उल्लंघन” बना सकता है
- और ट्रांसपोर्ट को रोकने का नया बहाना बन सकता है
A4 शीट:
- खराब हो सकती है
- उड़ या फट सकती है
- या सही ढंग से न लगी होने का आरोप लगाया जा सकता है
यहीं से दबाव, देरी और कथित वसूली की आशंका जन्म लेती है।
इनकम टैक्स रेड और नई व्यवस्था का कनेक्शन
हालांकि सरकार ने कहीं भी यह नहीं कहा कि यह आदेश धामपुर मामले से जुड़ा है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में इसे ऐसे देखा जा रहा है:
एक बड़ी यूनिट पर कार्रवाई → पूरे सेक्टर पर नियमों की सख्ती
यह प्रशासनिक पैटर्न नया नहीं है। जब भी किसी बड़े उद्योग पर छापा पड़ता है और सिस्टम की खामियां उजागर होती हैं, तो सरकार सेक्टर-वाइड कंट्रोल मैकेनिज्म लागू कर देती है।
कौन फायदे में, कौन नुकसान में?
- बड़ी डिस्टिलरी और प्रभावशाली समूह
→ नई व्यवस्था को आसानी से मैनेज कर लेंगे - छोटे ट्रांसपोर्टर, चीनी मिलें, खांडसारी इकाइयाँ
→ सबसे ज्यादा फील्ड जांच और दबाव का सामना करेंगी
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह व्यवस्था पारदर्शिता से ज्यादा नियंत्रण बढ़ाती है।
निष्कर्ष: पारदर्शिता या भय का परिणाम?
IESCMS में QR कोड की नई व्यवस्था को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसके पीछे की टाइमिंग और परिस्थितियाँ कई सवाल खड़े करती हैं।
- यह सीधे तौर पर धामपुर IT छापे का आदेश नहीं है
- लेकिन उसका प्रभाव और प्रशासनिक आफ्टर-शॉक जरूर माना जा सकता है
अब असली परीक्षा यह होगी कि:
- क्या इस व्यवस्था का उपयोग सिर्फ सत्यापन तक सीमित रहेगा
- या यह फील्ड स्तर पर नए विवाद और दबाव का औजार बन जाएगी?
फिलहाल इतना तय है कि
धामपुर चीनी मिल पर पड़े इनकम टैक्स छापे की गूंज अब आबकारी व्यवस्था में साफ सुनाई दे रही है।





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