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मोलासेस घोटाले की आहट? उत्पादन ठप होने की कगार पर, फिर भी 2.5 लाख कुंतल निर्यात—आबकारी विभाग में मची हलचल : सूत्र



लखनऊ। प्रदेश के आबकारी विभाग में मोलासेस (शीरा) को लेकर हालात तेजी से गर्माते जा रहे हैं। आबकारी आयुक्त लगातार दूसरे दिन भी मुख्यालय में डेरा जमाए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को डिप्टी एक्साइज कमिश्नर (उत्पादन) संजीव कांत और निजी सहायक अमित अग्रवाल के साथ मोलासेस से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों पर घंटों माथापच्ची की गई। वहीं, शुक्रवार को अवकाश होने के बावजूद दफ्तर खुलवाकर काम किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
इंडेंट रुका, उत्पादन संकट गहराया
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में मोलासेस का इंडेंट नहीं लग पाने से देसी शराब बनाने वाली डिस्टिलरी गंभीर संकट में हैं। कई इकाइयों में उत्पादन धीमा पड़ गया है, जबकि कुछ के सामने पूरी तरह बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। उद्योग जगत में इसे लेकर भारी नाराजगी है।
‘मिलेट्स शराब’ को फायदा पहुंचाने का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी आरोप लग रहे हैं कि मिलेट्स (अनाज) से बनने वाली शराब बनाने वाली कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए मोलासेस का इंडेंट जानबूझकर रोका जा रहा है। चर्चा है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों के साथ ‘अंडर द टेबल’ समझौते कर बाजार का संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
कमी के बीच ‘सरप्लस’ का खेल!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक ओर प्रदेश में मोलासेस की कमी बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग इसे ‘सरप्लस’ दिखाकर निर्यात की अनुमति दे रहा है। हाल ही में करीब 2.5 लाख कुंतल मोलासेस झुनझुनवाला नामक कारोबारी को निर्यात के लिए स्वीकृत किया गया है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
दलाल-नेटवर्क और मुनाफे का खेल?
सूत्रों के अनुसार, कुछ कारोबारी मोलासेस को कम कीमत पर खरीदकर विदेशों में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इस कथित खेल में विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की भी चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि इस निर्यात से होने वाले भारी मुनाफे में हिस्सेदारी तक तय है।
छुट्टी के दिन खुला दफ्तर, बढ़े सवाल
आबकारी मुख्यालय में छुट्टी के दिन भी फाइलों पर काम होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामला बेहद संवेदनशील है। लगातार बैठकों और अंदरखाने चल रही चर्चाओं ने पूरे विभाग को सवालों के घेरे में ला दिया है।
जांच की मांग तेज
मोलासेस संकट, निर्यात अनुमति और कथित मिलीभगत के आरोपों के बीच अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।
फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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