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वाराणसी में आबकारी विभाग का शीर्ष अधिकारी नदारद,पुलिस पकड़ रही तस्कर – विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

वाराणसी में आबकारी विभाग का शीर्ष अधिकारी नदारद,
पुलिस पकड़ रही तस्कर – विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
वाराणसी। जिले में अवैध शराब तस्करी लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई का मोर्चा लगभग पूरी तरह पुलिस संभाले हुए है, जबकि आबकारी विभाग का जिम्मेदार अधिकारी मौके से गायब बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार वाराणसी में तैनात डिप्टी एक्साइज कमिश्नर अपनी मूल पोस्टिंग पर शायद ही कभी उपस्थित रहते हैं और बिना किसी लिखित शासनादेश के खुद को जॉइंट डायरेक्टर (स्टैटिक्स) बताकर लखनऊ के तथाकथित कैंप कार्यालय में कार्यरत हैं।
इस प्रशासनिक शून्य का सीधा फायदा शराब तस्करों को मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में चंदौली पुलिस की कार्रवाई से सामने आया है, जहां करीब 15 लीटर अवैध शराब के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह के मुताबिक पुलिस टीम केली रोड के पास चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग पिट्ठू बैग में अवैध शराब लेकर मझवार रेलवे स्टेशन के गेट नंबर-2 से ट्रेन पकड़कर बिहार जाने की फिराक में हैं। सूचना पर घेराबंदी कर रेलवे स्टेशन गेट नंबर-2 के पास से दो अभियुक्तों को दबोच लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोशन कुमार (22) पुत्र अजीत रजक, निवासी ग्राम संदेश, थाना संदेश, जिला आरा (बिहार) और संदीप कुमार झा (21) पुत्र मनोज कुमार झा, निवासी ग्राम पकड़ी डिहवा, थाना बेतिया, जिला बेतिया (बिहार) के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के कब्जे से अवैध शराब बरामद कर मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस कर रही कार्रवाई, आबकारी कहां?
इस तरह की घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि जब पुलिस नियमित रूप से अवैध शराब पकड़ रही है, तो आबकारी विभाग की सक्रियता आखिर कहां है? जानकारों का कहना है कि यदि डिप्टी एक्साइज कमिश्नर नियमित रूप से वाराणसी में मौजूद रहते, तो रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और सीमावर्ती रूट पर पहले से ही सख्त निगरानी होती और तस्करों के नेटवर्क पर बड़ी चोट पड़ती।
लखनऊ में बैठकर वाराणसी कैसे चलेगा?
डिप्टी एक्साइज कमिश्नर के लखनऊ में तथाकथित कैंप कार्यालय से काम करने की चर्चाओं ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। नियमों के मुताबिक बिना शासनादेश किसी अन्य पद या स्थान पर कार्य करना पूरी तरह नियमविरुद्ध है। बावजूद इसके न तो अधिकारी की स्थिति स्पष्ट की जा रही है और न ही उनकी अनुपस्थिति पर कोई जवाबदेही तय हो रही है।
तस्करी का ट्रांजिट बनता वाराणसी
रेलवे स्टेशन, हाईवे और बस रूट के जरिए वाराणसी को अवैध शराब की ट्रांजिट लाइन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। बिहार जैसे शराबबंदी वाले राज्य के लिए यहां से लगातार सप्लाई की कोशिशें हो रही हैं। यह केवल राजस्व का नुकसान नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पर भी बड़ा सवाल है।
उठ रही हैं गंभीर मांगें
डिप्टी एक्साइज कमिश्नर की वास्तविक तैनाती और कार्यभार सार्वजनिक किया जाए
बिना आदेश लखनऊ में बैठने के मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
उनकी अनुपस्थिति के दौरान बढ़ी शराब तस्करी की जिम्मेदारी तय की जाए
वाराणसी में तत्काल पूर्णकालिक और सक्रिय आबकारी अधिकारी की तैनाती हो
जब पुलिस अकेले अवैध शराब के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हो और आबकारी विभाग का शीर्ष अधिकारी नदारद हो, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। अब देखना यह है कि शासन और आबकारी मुख्यालय इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेते हैं और वाराणसी को शराब तस्करों के सुरक्षित गलियारे बनने से रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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