
प्रदेश में आबकारी विभाग की सबसे बड़ी परीक्षा कल होने जा रही है, जब 1,793 शराब दुकानों के लिए लॉटरी प्रक्रिया आयोजित होगी। सबसे अधिक दुकानें लखनऊ और प्रयागराज में हैं, जहां विभाग की नजरें टिकी हुई हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में चंद दिन बाकी हैं और करीब 60 हजार करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को पूरा करने का दारोमदार अब इस लॉटरी पर आ गया है।
लेकिन इस बार स्थिति सामान्य नहीं है। आबकारी नीति को लेकर व्यापारियों में गहरा असंतोष है। बड़ी संख्या में लाइसेंस धारकों ने नवीनीकरण नहीं कराया, जिससे सैकड़ों दुकानें खाली रह गईं और विभाग को लॉटरी का सहारा लेना पड़ रहा है।
क्यों टूटा व्यापारियों का भरोसा?
व्यापारियों का आरोप है कि नई आबकारी नीति में लागत बढ़ा दी गई, जबकि मुनाफे की संभावनाएं कम कर दी गईं। इसके साथ ही विभागीय स्तर पर लगातार दबाव, जांच और वसूली की शिकायतों ने हालात और बिगाड़ दिए। कई लाइसेंस धारकों ने साफ कहा कि इस माहौल में काम करना “घाटे का सौदा” बन चुका है।
प्रमुख सचिव और कमिश्नर क्यों जिम्मेदार?
इस पूरे संकट के केंद्र में विभाग के शीर्ष अधिकारी माने जा रहे हैं—प्रमुख सचिव और आबकारी कमिश्नर। इसके पीछे कई ठोस तर्क सामने आ रहे हैं:
नीति निर्माण में जमीनी हकीकत की अनदेखी: आबकारी नीति बनाते समय व्यापारियों की व्यवहारिक दिक्कतों और बाजार की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया गया। परिणामस्वरूप, लाइसेंस फीस और शर्तें ऐसी तय हुईं, जो कई व्यापारियों के लिए असंभव हो गईं।
अत्यधिक राजस्व लक्ष्य का दबाव: विभाग ने अत्यधिक महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य तय किया, जिसे हासिल करने के लिए निचले स्तर पर अधिकारियों पर दबाव बनाया गया। यही दबाव आगे व्यापारियों तक “उत्पीड़न” के रूप में पहुंचा।
निगरानी और जवाबदेही की कमी: फील्ड स्तर पर हो रही शिकायतों—जैसे अनावश्यक कार्रवाई, जांच और कथित वसूली—पर समय रहते कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिससे व्यापारियों का भरोसा पूरी तरह टूट गया।
मॉडल शॉप जैसी योजनाओं की विफलता: करीब 100 मॉडल शॉप अब तक नहीं बिक पाईं, जो यह दिखाता है कि विभाग की योजनाएं जमीन पर सफल नहीं हो रहीं। इनकी उच्च लागत और कम रिटर्न ने व्यापारियों को दूर कर दिया।
अब लॉटरी ही आखिरी उम्मीद
विभाग के लिए अब 1,793 दुकानों की यह लॉटरी “करो या मरो” की स्थिति बन गई है। अगर इस प्रक्रिया में पर्याप्त आवंटन नहीं हो पाया, तो राजस्व लक्ष्य हासिल करना लगभग असंभव हो जाएगा।
बड़ा सवाल
क्या विभाग इस लॉटरी के सहारे अपनी साख और राजस्व दोनों बचा पाएगा, या फिर यह पूरी आबकारी नीति की विफलता का अंतिम प्रमाण साबित होगी? जवाब कल की लॉटरी के नतीजों में छिपा है।




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