
यूपी बजट 2026-27: आबकारी से ₹71,278 करोड़ का लक्ष्य, 17.37% वृद्धि का अनुमान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में राज्य उत्पाद शुल्क (आबकारी) से ₹71,278 करोड़ राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान ₹60,728.23 करोड़ की तुलना में ₹10,549.77 करोड़ की वृद्धि है। प्रतिशत के रूप में यह 17.37% की बढ़ोतरी दर्शाता है।
आबकारी राजस्व का बजट विश्लेषण
बजट दस्तावेज के अनुसार राज्य के स्वयं के कर राजस्व में वृद्धि के प्रमुख स्रोतों में आबकारी भी शामिल है। हालांकि SGST की तुलना में वृद्धि प्रतिशत कम है, लेकिन कुल राशि के हिसाब से आबकारी सरकार की आय का एक बड़ा स्तंभ बना हुआ है।
कैसे हासिल होगा लक्ष्य?
विशेषज्ञों के अनुसार 17% से अधिक की वृद्धि निम्न आधारों पर हासिल करने की रणनीति हो सकती है:
खुदरा दुकानों की लाइसेंस फीस एवं नवीनीकरण शुल्क में संशोधन
मॉडल शॉप और प्रीमियम दुकानों का विस्तार
आबकारी ड्यूटी में आंशिक वृद्धि
ई-लॉटरी के जरिए प्रतिस्पर्धी आवंटन
डिजिटल ट्रैकिंग और होलोग्राम प्रणाली से राजस्व लीकेज पर रोक
तस्करी और ओवररेटिंग: बड़ी चुनौती
पूर्वी उत्तर प्रदेश की बिहार सीमा से सटे जिलों में शराब तस्करी लंबे समय से चुनौती रही है। हालांकि स्पष्ट है कि अवैध तस्करी से कोई वैध राजस्व प्राप्त नहीं होता, बल्कि इससे राजस्व हानि और कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है।
इसी प्रकार दुकानों पर ओवररेटिंग भी सरकार के लिए दोहरी चुनौती है—एक ओर उपभोक्ता असंतोष और दूसरी ओर अनौपचारिक लेन-देन से पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न।
राजस्व संरचना में आबकारी की भूमिका
राज्य के कुल कर राजस्व ₹6,03,401.76 करोड़ के अनुमान में आबकारी की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण बनी हुई है। सामाजिक और विकास योजनाओं के वित्तपोषण में यह विभाग प्रमुख भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
₹71,278 करोड़ का आबकारी लक्ष्य केवल उपभोग वृद्धि पर आधारित नहीं है, बल्कि शुल्क संशोधन, संरचनात्मक सुधार और सख्त निगरानी के जरिए हासिल करने की रणनीति का संकेत देता है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विभाग राजस्व वृद्धि और नियंत्रण—दोनों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है।




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