
लखनऊ। गोंडा की स्टार लाइट डिस्टलरी में 58000 लीटर ईएनए चोरी के मामले में डिप्टी एक्साइज कमिश्नर आलोक कुमार ने अपनी गोपनीय जांच में इस घोटाले के लिए तत्कालीन पर्यवेक्षणी अधिकारी तत्कालीन डिप्टी एक्साइज कमिश्नर जो वर्तमान में जॉइंट एक्साइज कमिश्नर लखनऊ हैं तथा जिला सहायक आबकारी अधिकारी प्रगल्भ लवानिया डिस्टलरी में तैनात रामप्रीत चौहान और प्रवर्तन विभाग को दोषी माना है। अपनी गोपनी जांच में उन्होंने आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह से इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। आलोक कुमार की गोपनीय रिपोर्ट आने के बाद आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह असमंजस में है। असमंजस की स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि जॉइंट एक्साइज कमिश्नर दिलीप कुमार मणि त्रिपाठी उनके बेहद खास है। इस समय जॉइंट एक्साइज कमिश्नर लखनऊ के साथ-साथ ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर मुख्यालय तथा डिप्टी एक्साइज कमिश्नर शीरा का प्रभार देख रहे हैं। अपनी गोपनीय जांच रिपोर्ट में आलोक कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि तत्कालीन पर्यवेक्षक अधिकारियों ने यदि अपने दायित्व का निर्वाह किया होता तो 58000 लीटर ईएनए चोरी होने या गबन होने से रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन इकाइयों ने ट्रैक और ट्रैस सिस्टम का उपयोग करते हुए मध्य प्रदेश के नौगांव स्थित डिस्टलरी से ईएनए लाने वाले टैंकर जीपीएस लोकेशन की उत्तर प्रदेश में मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। इस प्रकरण में पूर्व जॉइंट एक्साइज कमिश्नर ईआईबी के स्तर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
आलोक कुमार ने सबके खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति रिपोर्ट 2 दिसंबर 2024 को आबकारी मुख्यालय में भेज दी।




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