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**हजारों करोड़ के PWD टेंडरों पर सवाल16 जनवरी 2026 को खुले टेंडर, एक ही वर्ग को मिले कामPMO तक पहुंची शिकायत, प्रमुख अभियंता की भूमिका कटघरे में**



लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में हजारों करोड़ रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 16 जनवरी 2026 को खोले गए PWD के टेंडरों में एक ही वर्ग विशेष से जुड़े ठेकेदारों को प्राथमिकता दी गई, जिससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को शिकायत भेजी गई है, जिसमें PWD के शीर्ष अधिकारियों, विशेषकर प्रमुख अभियंता की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
16 जनवरी 2026: टेंडर प्रक्रिया पर उठा संदेह
शिकायत में कहा गया है कि 16 जनवरी 2026 को:
PWD के अलग-अलग सर्किलों और परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये के टेंडर खोले गए।
इन टेंडरों में अधिकांश कार्य एक ही वर्ग/समूह से जुड़े ठेकेदारों को मिल गया, जबकि अन्य पात्र ठेकेदारों को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि यह स्थिति संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित प्रक्रिया की ओर संकेत करती है।
प्रमुख अभियंता की भूमिका पर सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि:
इतने बड़े स्तर के टेंडरों का आवंटन प्रमुख अभियंता की जानकारी और अनुमोदन के बिना संभव नहीं है।
टेंडर की शर्तें, तकनीकी पात्रता और अंतिम स्वीकृति में
शीर्ष स्तर से हस्तक्षेप होने का आरोप है।
इसलिए जांच केवल निचले अधिकारियों तक सीमित न रहकर
पूरी प्रशासनिक श्रृंखला तक होनी चाहिए।
गोमती नगर की आलीशान कोठी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया है कि:
गोमती नगर क्षेत्र में PWD के एक वरिष्ठ अभियंता की आलीशान कोठी नियमों के विपरीत बताई जा रही है।
आम नागरिकों के अवैध निर्माण पर त्वरित कार्रवाई होती है,
तो फिर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित अभियंता पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या यह मामला प्रशासनिक संरक्षण से जुड़ा हुआ है?
केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने:
CBI अथवा किसी अन्य स्वतंत्र केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
राज्य स्तर की जांच को प्रभावहीन बताते हुए कहा गया है कि
हजारों करोड़ रुपये के टेंडरों की निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी से ही संभव है।
PMO तक क्यों पहुंचा मामला
शिकायतकर्ता के अनुसार:
राज्य स्तर पर बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इसी कारण पूरे मामले के दस्तावेज और कथित सबूत
प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए हैं।
अवध भूमि टिप्पणी
PWD से जुड़ा यह मामला अब केवल विभागीय टेंडर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें
प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और समान अवसर जैसे मूल प्रश्न जुड़े हुए हैं।
यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला
उत्तर प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े टेंडर विवादों में शामिल हो सकता है।
खबर लिखे जाने तक लोक निर्माण विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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