
एक्स्ट्रा आइटम, वेरिएशन, बिना टेंडर खर्च और संभावित हितों के टकराव पर एसआईटी जांच की मांग तेज
अवध भूमि न्यूज़ डेस्क
जिले के लोक निर्माण विभाग (निर्माण खंड–2) में जिला योजना के अंतर्गत कराए गए सड़क निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ सड़कों की वास्तविक भौतिक लंबाई कम होने के बावजूद अभिलेखों में लंबाई बढ़ाकर अधिक एस्टिमेट स्वीकृत कराया गया और बाद में बची हुई धनराशि का उपयोग बिना विधिवत टेंडर प्रक्रिया के अन्य कार्यों में कर दिया गया।
मामले में एक्स्ट्रा आइटम और वेरिएशन के नाम पर अतिरिक्त भुगतान, तथा संबंधित फर्म विधि इंटरप्राइजेज की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरोप क्या हैं?
वास्तविक लंबाई कम, कागजों में अधिक दर्शाई गई। सबसे ज्यादा शिकायत में पट्टी सदर और मांधाता ब्लॉक में आ रही हैं
मूल स्वीकृत एस्टिमेट से अलग अतिरिक्त मद (Extra Item) जोड़कर भुगतान
वेरिएशन के नाम पर कार्य की मात्रा में बदलाव और अतिरिक्त भुगतान
बची हुई धनराशि को बिना नए टेंडर के अन्य सड़कों पर खर्च
कार्य आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न
किन-किन नियमों के उल्लंघन के आरोप?
यदि लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं, तो निम्न नियमों/प्रक्रियाओं के उल्लंघन की आशंका बनती है:
1️⃣ यूपी फाइनेंशियल हैंडबुक (Financial Handbook) के प्रावधान
बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अतिरिक्त व्यय नहीं किया जा सकता।
स्वीकृत मद से हटकर खर्च के लिए संशोधित प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति आवश्यक होती है।
2️⃣ सार्वजनिक खरीद (टेंडर) नियम
किसी भी नए कार्य या अतिरिक्त कार्य के लिए ई-टेंडर/प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होती है।
बिना टेंडर सीधे कार्य आवंटन वित्तीय अनियमितता मानी जा सकती है (जब तक कि आपातकालीन प्रावधान लागू न हों)।
3️⃣ पीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल के प्रावधान
कार्य की माप पुस्तिका (Measurement Book – MB) में वास्तविक स्थल माप के आधार पर ही भुगतान किया जाना चाहिए।
वेरिएशन निर्धारित सीमा से अधिक होने पर उच्च स्तर की तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होती है।
4️⃣ जीएफआर (General Financial Rules) के सिद्धांत
पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और निष्पक्षता सार्वजनिक धन के उपयोग का मूल सिद्धांत है।
“Value for Money” और “Accountability” अनिवार्य है।
5️⃣ हितों के टकराव (Conflict of Interest) के सिद्धांत
यदि किसी अधिकारी का किसी ठेकेदार फर्म से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध सिद्ध होता है, तो यह सेवा आचरण नियमों के तहत गंभीर विषय हो सकता है।
अधिशासी अभियंता बी.एम. सिंह की भूमिका पर सवाल
पूरा मामला अधिशासी अभियंता बी.एम. सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सूत्रों का दावा है कि करोड़ों रुपये का भुगतान संबंधित फर्मों को किया गया, जबकि प्रक्रियागत अनुमोदन और तकनीकी स्वीकृति की पारदर्शिता स्पष्ट नहीं है।
हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विधि इंटरप्राइजेज की सड़कों की थर्ड पार्टी जांच की मांग
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि विधि इंटरप्राइजेज द्वारा निर्मित सभी सड़कों की:
भौतिक लंबाई का पुनः सत्यापन
गुणवत्ता परीक्षण (लेबोरेटरी टेस्ट सहित)
भुगतान और एस्टिमेट का तुलनात्मक ऑडिट
एक्स्ट्रा आइटम और वेरिएशन की तकनीकी आवश्यकता की समीक्षा
किसी स्वतंत्र विभाग या थर्ड पार्टी एजेंसी से कराई जाए।
एसआईटी जांच की उठी मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्माण खंड–2 में जिला योजना के तहत कराए गए सभी कार्यों की विशेष जांच टीम (SIT) से जांच कराने की मांग तेज हो गई है।
जनता का कहना है कि जिला योजना का बजट जनता के टैक्स से आता है — ऐसे में यदि गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
अब निगाहें शासन-प्रशासन पर
क्या शासन इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश देगा?
क्या तकनीकी ऑडिट और वित्तीय परीक्षण कराया जाएगा?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी?
इन सवालों के जवाब आने तक निर्माण खंड–2 का यह प्रकरण जिले में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।




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