
देवरिया के बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबित, हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना पर कार्रवाई
लखनऊ/देवरिया, 27 फरवरी 2026।
उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देवरिया की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में लापरवाही और शासकीय दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता के आरोपों के बाद की गई है।
क्या है पूरा मामला?
जिलाधिकारी देवरिया ने 23 फरवरी 2026 को शासन को पत्र भेजकर दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेने को कहा था। खबर में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद संबंधित प्रकरण में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
शासन स्तर पर मामले की जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका संख्या 7446/2023 में 13 फरवरी 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में अपेक्षित कार्रवाई समय से नहीं की गई। आदेश में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रभावी पालन नहीं हुआ।
किन आरोपों में निलंबन?
जांच में यह तथ्य सामने आया कि—
न्यायालय के आदेश का समयबद्ध अनुपालन नहीं किया गया।
शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता बरती गई।
दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं हुआ।
इन्हीं आधारों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-4 के तहत शालिनी श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
विभागीय जांच के आदेश
निलंबन के साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही भी प्रारंभ कर दी गई है। जांच अधिकारी के रूप में संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को नामित किया गया है, जो पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करेंगे।
निलंबन अवधि में क्या व्यवस्था?
निलंबन अवधि में शालिनी श्रीवास्तव को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
यह भत्ता नियमानुसार देय वेतन का एक निश्चित अंश होगा।
उन्हें किसी अन्य सेवा, व्यवसाय या कार्य में संलग्न न रहने का प्रमाण देना होगा।
निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ निर्धारित किया गया है।
शासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को शासन की सख्त प्रशासनिक रुख के रूप में देखा जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को शासन ने गंभीरता से लिया है और स्पष्ट संकेत दिया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस घटनाक्रम से बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है और अन्य अधिकारियों के बीच भी जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर विभागीय जांच की रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।




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