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अंगद के पांव की तरह 12 साल से जमे रणवीर सिंह पटेल, डीडीओ ऑफिस में ट्रांसफर-पोस्टिंग का बड़ा खेल?”


आने वाले ट्रांसफर सीजन से पहले हलचल तेज, कार्यशैली और वित्तीय पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल


विस्तृत खबर:
जिले के डीडीओ (जिला विकास अधिकारी) कार्यालय में इन दिनों अंदरखाने चल रही गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों और सूत्रों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार, कुछ अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिनकी पकड़ इतनी मजबूत बताई जा रही है कि उन्हें “अंगद के पांव” की संज्ञा दी जा रही है।
इसी क्रम में सबसे अधिक चर्चा रणवीर सिंहपटेल के नाम को लेकर है, जो कथित तौर पर पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद और स्थान पर तैनात बताए जा रहे हैं। इतनी लंबी तैनाती प्रशासनिक नियमों पर सवाल खड़े कर रही है। यह भी कहा जा रहा है कि पटल सहायक रहते हुए उन्हें कई अन्य स्थानों का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया, जो सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग में ‘रेट’ की चर्चा, सिस्टम पर सवाल
कार्यालय के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग अब एक सामान्य प्रक्रिया न रहकर कथित तौर पर “सिस्टम” बन चुकी है।  सूत्रों के अनुसार, एक ट्रांसफर के लिए कथित तौर परलगभग ₹1,30,000 तक के लेन-देन की चर्चा है, जिसमें ₹30,000 पटल स्तर और बाकी राशि उच्च स्तर तक जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती चर्चाओं ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले ट्रांसफर सीजन को लेकर भी कर्मचारियों में आशंका है कि इस बार बड़े स्तर पर “सेटिंग” और “मैनेजमेंट” का खेल हो सकता है।
नियमों के विपरीत तैनाती का मामला, नए सवाल
नियमों के अनुसार, किसी ग्राम विकास अधिकारी को उसके होम ब्लॉक में तैनाती नहीं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद मोहम्मद फरीद को ग्राम पंचायत ताला, विकासखंड बाबा बेलखरनाथ धाम में तैनात किए जाने का मामला चर्चा में है।
यह तैनाती इसलिए भी सवालों में है क्योंकि फरीद पर पहले आसपुर देवसरा ब्लॉक में तैनाती के दौरान करोड़ों रुपये के गबन के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें हटाया गया था। अब उसी कर्मचारी को उसके होम ब्लॉक में तैनाती दिए जाने पर कई गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय को लेकर प्रवीण पटेल और प्रभारी डीडीओ संतोष सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि आखिर इस कर्मचारी पर इतनी “कृपा” क्यों दिखाई जा रही है और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
संजय यादव को 4 ACP, फैसले पर उठे सवाल
कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी संजय यादव को चार एसीपी (Assured Career Progression) दिए जाने का मामला भी चर्चा में है। कर्मचारियों का कहना है कि इतने बड़े लाभ के पीछे क्या आधार और नियम अपनाए गए, यह स्पष्ट नहीं है।
इस फैसले के बाद कार्यालय में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
प्रभारी डीडीओ संतोष सिंह की कार्यशैली भी घेरे में
प्रभारी डीडीओ संतोष सिंह, जो डीसी मनरेगा का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं, उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके कार्यकाल में पारदर्शिता की कमी महसूस की जा रही है।
कुछ चर्चाओं में यह भी सामने आया है कि मनरेगा से जुड़े मामलों में निष्क्रिय (Inactive) फर्मों को भुगतान किए जाने की आशंका है। यदि यह सच पाया जाता है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
जीएसटी और भुगतान प्रक्रिया पर भी शक
सूत्रों के अनुसार, कार्यालय में जीएसटी से जुड़ी संभावित अनियमितताओं और राजस्व हानि की भी चर्चा है। इसके अलावा—
फर्जी या निष्क्रिय फर्मों को भुगतान
कागजी कार्यों का निष्पादन
बिना सत्यापन के बिल पास होना
जैसी संभावित गड़बड़ियों की भी आशंका जताई जा रही है। हालांकि इन सभी बिंदुओं की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कर्मचारियों में असंतोष, कार्यालय का माहौल प्रभावित
कार्यालय के कई कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा समय में पारदर्शिता और अनुशासन की कमी साफ दिखाई दे रही है। निर्णय प्रक्रिया पर कुछ लोगों का वर्चस्व होने की बात भी सामने आ रही है, जिससे अन्य कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
क्या होगी कार्रवाई?
अब निगाहें शासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या इन आरोपों और चर्चाओं को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी या नहीं।
यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो ट्रांसफर-पोस्टिंग सिस्टम से जुड़े कई पहलुओं का खुलासा हो सकता है और लंबे समय से जमे कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

आरोप बेहद गंभीर है। बिंदुवार जांच की जानी चाहिए जिस की चर्चाओं पर विराम लग सके। फिलहाल मोहम्मद फरीद की तैनाती और रणवीर  सिंह पटेल का 12 साल तक बिना स्थानांतरण पद पर बने रहना साथ में संजय यादव प्रशासनिक अधिकारीको चार एसीपी मिलने का मामला इतना गंभीर है कि इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।

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