
नई दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अज्ञानता और नासमझ के चलते धर्म के आधार पर अत्याचार करना गलत है। समझा जा रहा है कि मोहन भागवत का यह बयान पिछड़े दलित और आदिवासी समुदाय द्वारा मनुस्मृति विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। संघ को अब यह चिंता सता रहा है कि यदि संघ पर मनुस्मृति समर्थक का टैग लग गया तो इसकी छवि पर दीर्घकालिक डेंट लग जाएगा जिसे मिटना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर मनुस्मृति लागू करने का जो आरोप लगाया जा रहा है उससे संघ को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत इस बात से चिंतित हैं कि पिछड़े दलित और आदिवासी अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को शक की दृष्टि से देख रहे हैं। संघ इस बात से भी मुखर रूप से चिंतित है कि अंबेडकर और मनुस्मृति विवाद को जिस तरह पेश किया जा रहा है उससे संघ को दलित पिछड़े और आदिवासी समाज में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। संघ की चिंता केवल इतना ही नहीं है बल्कि वह इस बात से भी चिंतित है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई अन्य नेता केवल सरकार बनाए रखने के लिए कट्टर हिंदुत्व की बात कर रहे हैं जिससे हिंदुत्व की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान और आईएसआईएस जैसे बन रही है। आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में ही विचार युद्ध छोड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।




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